लखनऊ

लखनऊ में पहली बार, अपोलो हॉस्पिटल में बिना ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ सफल लीवर ट्रांसप्लांट

अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के डॉक्टरों की टीम ने पहली बार एक बेहद दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण लीवर ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक अंजाम देकर मेडिकल क्षेत्र में नई मिसाल पेश की है। इस सर्जरी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि पूरे ऑपरेशन के दौरान 56 वर्षीय मरीज को एक भी यूनिट खून (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) नहीं चढ़ाना पड़ा।

NIT-News

लखनऊ, 14 मई 2026, अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के डॉक्टरों की टीम ने पहली बार एक बेहद दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण लीवर ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक अंजाम देकर मेडिकल क्षेत्र में नई मिसाल पेश की है। इस सर्जरी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि पूरे ऑपरेशन के दौरान 56 वर्षीय मरीज को एक भी यूनिट खून (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) नहीं चढ़ाना पड़ा। गंभीर स्थिति में पहुंचे इस मरीज को सफल सर्जरी के बाद नई जिंदगी मिली है। आमतौर पर लीवर ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को 20 से 25 दिन तक अस्पताल में रहना पड़ता है, लेकिन बेहतर रिकवरी के चलते इस मरीज को ऑपरेशन के महज 8वें दिन ही छुट्टी दे दी गई। उल्लेखनीय है कि अपोलो की लीवर ट्रांसप्लांट टीम पिछले 7 महीनों में 20 सफल लीवर ट्रांसप्लांट कर चुकी है।
यह मरीज उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले का रहने वाला है। अस्पताल आने पर उसकी हालत काफी गंभीर थी। मरीज का एमईएलडी स्कोर (MELD Score) 30 था। इसका अर्थ है कि मरीज का लीवर बेहद गंभीर स्थिति में था और उसे तुरंत लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत थी। मरीज की जान बचाने के लिए उसकी 45 वर्षीय पत्नी ने अपना लीवर डोनेट किया। यह लीवर ट्रांसप्लांट अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ के डॉ. अभिषेक यादव, सीनियर डायरेक्टर एवं हेड लिवर ट्रांसप्लांट, और डॉ. उत्कर्ष श्रीवास्तव, कंसलटेंट लिवर ट्रांसप्लांट, व उनकी टीम द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।
डॉ. अभिषेक यादव ने बताया कि आमतौर पर लीवर ट्रांसप्लांट में भारी मात्रा में ब्लड लॉस होता है। सामान्य तौर पर ऐसी सर्जरी में 2 से 3 लीटर तक खून बह सकता है, जिसके कारण मरीज को कई यूनिट खून चढ़ाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस केस में मरीज के लिए पर्याप्त ब्लड डोनर उपलब्ध नहीं थे। इसे देखते हुए टीम ने पहले से ही ब्लड लॉस को कम से कम रखने की रणनीति तैयार की थी। टीम ने बेहद सावधानी से ऑपरेशन किया और ब्लीडिंग को न्यूनतम रखा। नतीजा यह रहा कि पूरी सर्जरी बिना किसी ब्लड ट्रांसफ्यूजन के पूरी हो गई। मरीज अब स्वस्थ है और डिस्चार्ज होकर घर जाने की स्थिति में है।
उन्होंने आगे बताया कि पहले लीवर ट्रांसप्लांट के लिए 8 से 10 यूनिट तक ब्लड की व्यवस्था करनी पड़ती थी, बिना खून चढ़ाए लीवर ट्रांसप्लांट करना एक बेहद दुर्लभ एवं जटिल प्रक्रिया है लेकिन एक्सपर्ट टीम और एडवांस सर्जिकल मैनेजमेंट की मदद से कई मामलों में यह संभव हो सकता है। उन्होंने बताया कि अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल में पिछले 7 महीनों में 20 सफल लीवर ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं जिनमें कुछ बेहद जटिल ट्रांसप्लांट भी शामिल हैं। सभी मरीज़ फॉलो अप में हैं व रिकवर कर रहे हैं ।
इस महत्वपूर्ण मेडिकल उपलब्धि पर अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के एमडी और सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने कहा, “लिवर ट्रांसप्लांट अपने आप में एक अत्यंत जटिल सर्जरी है, जिसमें 8 से 10 यूनिट खून की जरूरत पड़ती ही है। ऐसी जटिल सर्जरी को बिना एक भी बोतल खून चढ़ाए सफलतापूर्वक पूरा करना पूरी मेडिकल टीम और सर्जनों की विशेष कुशलता का परिणाम है। यह सफलता साबित करती है कि अपोलोमेडिक्स अस्पताल में विश्वस्तरीय स्पेशलिस्ट, सुविधाएं और एडवांस सर्जिकल तकनीक मौजूद हैं। एक बेहद गंभीर मरीज को बिना खून चढ़ाए नई जिंदगी देना हमारे लिए गर्व की बात है। हम इस क्षेत्र के मरीजों को लखनऊ में ही सुरक्षित और बेहतरीन चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”

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