उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (TLPS) 2025 रिपोर्ट का विमोचन,

लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) ने टाटा ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से आज इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में उत्तर प्रदेश टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (TLPS) 2025 रिपोर्ट का विमोचन किया। यह रिपोर्ट कक्षा 1 एवं 2 के शिक्षण-अधिगम व्यवहारों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है

NIT-News

लखनऊ, 30 जून 2026: लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) ने टाटा ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से आज इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में उत्तर प्रदेश टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (TLPS) 2025 रिपोर्ट का विमोचन किया। यह रिपोर्ट कक्षा 1 एवं 2 के शिक्षण-अधिगम व्यवहारों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है तथा कक्षा-कक्ष की प्रक्रियाओं, शिक्षक सहायता तंत्र और शिक्षण गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित सुझाव प्रदान करती है। रिपोर्ट का विमोचन उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा श्री पार्थसारथी सेन शर्मा, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा सुश्री मोनिका रानी, एससीईआरटी निदेशक श्री गणेश कुमार, समग्र शिक्षा के अधिकारियों, टाटा ट्रस्ट, एलएलएफ, डायट, जिला शिक्षा अधिकारियों तथा शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। यह आयोजन “पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग: ट्रांसफॉर्मिंग क्लासरूम प्रैक्टिसेज” के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें नीति-निर्माताओं, शिक्षा विशेषज्ञों एवं राष्ट्रपति एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने कक्षा-कक्ष की गुणवत्ता सुधार पर विचार-विमर्श किया। नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच किए गए इस सर्वेक्षण में बहराइच, बरेली, मिर्जापुर और रायबरेली के 200 विद्यालयों एवं 200 कक्षाओं का अध्ययन किया गया। सर्वे में कक्षा-कक्ष अवलोकन, पाठ संचालन, समय उपयोग तथा शिक्षक साक्षात्कार के माध्यम से शिक्षण की छह प्रमुख आयामों—कक्षा वातावरण, पाठ योजना एवं संचालन, भाषा शिक्षण, गणित शिक्षण, समय प्रबंधन तथा शिक्षक दृष्टिकोण—का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में प्रारम्भिक शिक्षा के क्षेत्र में कई सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। 97% कक्षाओं में कार्यशील श्यामपट्ट उपलब्ध थे, 97% शिक्षक FLN अधिगम लक्ष्यों से परिचित थे, 94% शिक्षकों को क्लस्टर एवं ब्लॉक संसाधन समन्वयकों से शैक्षणिक सहयोग प्राप्त हुआ, जबकि 78% शिक्षक बच्चों के आकलन का लिखित अभिलेख रखते पाए गए। साथ ही रिपोर्ट ने समावेशी शिक्षण, बेहतर पाठ योजना, प्रभावी प्रतिपुष्टि, बच्चों की सक्रिय भागीदारी, भाषा एवं गणित शिक्षण को अधिक संवादात्मक बनाने तथा शिक्षकों के सतत व्यावसायिक सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री पार्थसारथी सेन शर्मा ने कहा – हमें अपनी कक्षाओं में सकारात्मक एवं सुरक्षित वातावरण बनाते हुए बच्चों को नियमित पठन एवं लेखन के अवसर देने होंगे। साथ ही कक्षा-कक्ष में समझ की जाँच के विविध तरीकों को अपनाते हुए हमें नियमित आकलन एवं कैच अप शिक्षण करना होगा। श्री पार्थसारथी सेन शर्मा ने निर्देश दिया कि रिपोर्ट की 10 प्रमुख अनुशंसाओं पर आगामी शिक्षक क्लस्टर बैठकों में अनिवार्य रूप से चर्चा की जाए तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विद्यालय स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जाए। सुश्री मोनिका रानी ने कक्षा में शिक्षक और बच्चों के मध्य आत्मीय संबंध बढ़ाने की बात की एवं स्कूल को समुदाय से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक कृष्ण हैं एवं उन्हे अपने विद्यार्थियों को अर्जुन की तरह तैयार करना होगा। अपने पूर्व के अनुभवों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि शिक्षक अगर ठान लें तो बच्चे बेहतर तरीके से सीखेंगे और उनके जीवन में सार्थक बदलाव होगा। एससीईआरटी निदेशक श्री गणेश कुमार ने प्रेक्टिस आधारित शिक्षा की बात की। बच्चे खेल-खेल में सीखें इसपर जोर दिया। वहीं, टाटा ट्रस्ट की सुश्री ज्योत्सना तथा एलएलएफ के संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक डॉ. धीर झिंगरन ने कहा कि बच्चों के सीखने में स्थायी सुधार तभी संभव है जब प्रत्येक कक्षा में गुणवत्तापूर्ण, सहभागी और बाल-केंद्रित शिक्षण सुनिश्चित किया जाए।

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