भारत जोड़ो यात्रा की चौथी सालगिरह पर इमरान प्रतापगढ़ी ने साझा की यादें, राहुल गांधी के साथ यात्रा के अनुभवों को किया याद
भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत के चार वर्ष पूरे होने के मौके पर कांग्रेस सांसद और शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने यात्रा से जुड़ी अपनी यादों को साझा करते हुए राहुल गांधी के संघर्ष, पैदल सफर और लोगों से जुड़ने के अनुभव को भावुक अंदाज में याद किया। उन्होंने कहा कि 7 सितंबर 2022 को कन्याकुमारी के समुद्र तट से शुरू हुआ

नैयर आजम
नई दिल्ली, 7 सितंबर। भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत के चार वर्ष पूरे होने के मौके पर कांग्रेस सांसद और शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने यात्रा से जुड़ी अपनी यादों को साझा करते हुए राहुल गांधी के संघर्ष, पैदल सफर और लोगों से जुड़ने के अनुभव को भावुक अंदाज में याद किया। उन्होंने कहा कि 7 सितंबर 2022 को कन्याकुमारी के समुद्र तट से शुरू हुआ यह सफर महज एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि देश को जोड़ने और लोगों के बीच मोहब्बत का संदेश पहुंचाने का प्रयास था।

इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि 7 सितंबर 2022 को कन्याकुमारी में समुद्र के साहिल पर खड़े होकर राहुल गांधी ने भारत के एक छोर से दूसरे छोर तक पैदल चलने का संकल्प लिया था। इस यात्रा का संदेश था— “नफ़रत छोड़ो, भारत जोड़ो।” उनके मुताबिक, इसके बाद देश ने राहुल गांधी को लगातार हजारों किलोमीटर पैदल चलते देखा और अलग-अलग राज्यों में लोगों का हुजूम उनके साथ जुड़ता चला गया। उन्होंने यात्रा के पड़ावों को याद करते हुए कहा कि कन्याकुमारी से शुरू हुआ यह कारवां केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश होते हुए जम्मू-कश्मीर तक पहुंचा। इस दौरान राहुल गांधी लगातार पैदल चलते रहे और लोगों से संवाद करते रहे।
प्रतापगढ़ी ने अपने बयान में कहा कि यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने अपने पैरों में पड़े छालों की भी परवाह नहीं की और लगातार आगे बढ़ते रहे। उन्होंने इसे केवल भौगोलिक दूरी तय करने वाली यात्रा नहीं, बल्कि “भारत को जोड़ने और दिलों को जोड़ने” वाला अभियान बताया।

उन्होंने लिखा कि यात्रा के दौरान राहुल गांधी कभी खामोश नजर आए तो कभी लोगों के बीच अपनी बात रखते दिखाई दिए। उनके मुताबिक, यात्रा का संदेश नफरत के माहौल में मोहब्बत और भाईचारे की बात करना था। उन्होंने इसे “नफ़रत के बाज़ार में मुहब्बत की दुकान खोलने” की कोशिश करार दिया।
अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने वाला अनुभव
भारत जोड़ो यात्रा की यादों को साझा करते हुए इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि उनके जेहन में आज भी यात्रा के दौरान के कई दृश्य ताजा हैं। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और समुदायों के लोगों का यात्रा से जुड़ना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।
उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान नए नारे सुनने को मिले, अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से मुलाकात हुई और राहुल गांधी को आम लोगों के साथ घुलते-मिलते, उन्हें गले लगाते और उनकी बातें सुनते देखा गया। उनके मुताबिक, यही यात्रा की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक थी।

“मेरी खुशकिस्मती है कि मैं यात्रा में राहुल का हमराही रहा”
इमरान प्रतापगढ़ी ने भारत जोड़ो यात्रा में अपनी भागीदारी को अपनी खुशकिस्मती बताते हुए कहा कि वह इस सफर में राहुल गांधी के हमराही रहे। उन्होंने अपने पैर के अंगूठे के टूटे हुए नाखून का जिक्र करते हुए कहा कि वह निशान आज भी उन्हें उस यात्रा की याद दिलाता है।
उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान हुई शारीरिक तकलीफें उनके लिए आज भी गर्व की बात हैं, क्योंकि वे उस दौर की गवाही देती हैं जब उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में पैदल चलकर लोगों से संवाद करने का प्रयास किया।

“आने वाली नस्लें पूछेंगी कि तब तुम कहां थे”
कांग्रेस सांसद ने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि आने वाली पीढ़ियां जब उनसे यह सवाल करेंगी कि जब देश में नफरत का माहौल बढ़ रहा था, तब वे कहां थे, तो वह सिर उठाकर जवाब दे सकेंगे कि वह अपने घर में नहीं बैठे थे, बल्कि अपने दौर के गांधी के साथ पैदल चल रहे थे।
उन्होंने कहा कि उनके लिए भारत जोड़ो यात्रा केवल अतीत की कोई राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि ऐसा अनुभव है जो उनके साथ लंबे समय तक रहेगा।
अपने संदेश के अंत में इमरान प्रतापगढ़ी ने अपनी शायरी के जरिए उस दौर और अपने संकल्प को शब्द दिए—
“जो हर ज़ालिम से टकरायेगी वो आंधी बनाऊंगा, नये अंग्रेज़ आये हैं नया गांधी बनाऊंगा।”
इमरान प्रतापगढ़ी का यह संदेश भारत जोड़ो यात्रा की चौथी वर्षगांठ पर साझा किया गया, जिसमें उन्होंने यात्रा के दौरान राहुल गांधी के साथ बिताए पलों, देश के विभिन्न हिस्सों में मिले लोगों और अपने व्यक्तिगत अनुभवों को भावुक अंदाज में याद किया।
उनके बयान में भारत जोड़ो यात्रा को लेकर एक ऐसे अभियान के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसका मूल संदेश नफरत के खिलाफ खड़े होकर लोगों के बीच प्रेम, भाईचारे और एकता की बात करना था।




