भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा ही विकसित भारत की आधारशिला : अशोक गांगुली
भारतीय शिक्षा दिवस (स्थापना दिवस) के अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, अवध प्रांत, एकम नॉलेज फाउंडेशन, अयोध्या एवं कबीर शान्ति मिशन के संयुक्त तत्वावधान में "पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास : भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में" विषय पर एक भव्य राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन गोमती नगर स्थित श्री राकेश कुमार मित्तल सभागार, स्मृति भवन में सम्पन्न हुआ

Nit-News
लखनऊ, 2 जुलाई 2026। भारतीय शिक्षा दिवस (स्थापना दिवस) के अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, अवध प्रांत, एकम नॉलेज फाउंडेशन, अयोध्या एवं कबीर शान्ति मिशन के संयुक्त तत्वावधान में “पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास : भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में” विषय पर एक भव्य राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन गोमती नगर स्थित श्री राकेश कुमार मित्तल सभागार, स्मृति भवन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति, अध्यात्म एवं समाज जीवन से जुड़े शिक्षाविदों, लोक सेवकों, विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों, शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा प्रबुद्ध नागरिकों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। त्रिवेणी कला संगम, अवध की सुश्री नितिका शर्मा एवं उनकी टीम ने मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर भारतीय सांस्कृतिक चेतना का भावपूर्ण वातावरण निर्मित किया। इसके उपरांत भाग्य मंदिर की साधिका श्रीमती रजनी शुक्ला एवं उनकी टीम द्वारा पंचकोष आधारित ध्यान एवं नाम-संकीर्तन कराया गया, जिससे पूरा सभागार आध्यात्मिक ऊर्जा से अनुप्राणित हो उठा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व प्रमुख सचिव (राज्यपाल) श्री जी. बी. पटनायक ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि संस्कारित, उत्तरदायी, चरित्रवान एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने भारतीय जीवन-मूल्यों को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया।मुख्य वक्ता एवं सीबीएसई के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक गांगुली ने कहा कि “भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा ही विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला है। नई शिक्षा व्यवस्था तभी सार्थक होगी, जब उसमें भारतीय चिंतन, नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण को केंद्र में रखा जाएगा।” उन्होंने पंचकोष आधारित शिक्षा प्रणाली को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का प्रभावी एवं वैज्ञानिक आधार बताया।शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के केंद्रीय अधिकारी, राजस्थान क्षेत्र सह संयोजक एवं विशिष्ट अतिथि श्री नितिन कासलीवाल ने देशभर में चल रहे भारतीय शिक्षा जागरण अभियान की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विकसित भारत के निर्माण में भारतीय शिक्षा दर्शन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, अवध प्रांत के प्रांत संयोजक श्री प्रमिल द्विवेदी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि भारतीय शिक्षा दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा दर्शन को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का राष्ट्रीय जन-अभियान है। उन्होंने न्यास द्वारा शिक्षा, संस्कृति एवं चरित्र निर्माण के क्षेत्र में संचालित विविध गतिविधियों का भी परिचय कराया।प्रख्यात पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. मत्स्येंद्र प्रभाकर ने पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण की अवधारणा को भारतीय चिंतन की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसे वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में समाहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।न्यास की चरित्र निर्माण टोली के सदस्य श्री चिंतामणि कौशिक ने पंचकोष आधारित व्यक्तित्व विकास की व्यवहारिक कार्ययोजना प्रस्तुत की।वहीं कनाडा से अंतरराष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक डॉ. अमरेश श्रीवास्तव का विशेष ऑडियो संदेश भी प्रसारित किया गया, जिसमें उन्होंने मनोमय कोष एवं न्यूरोसाइंस के संबंध को सरल एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्पष्ट किया।एकम नॉलेज फाउंडेशन, अयोध्या के श्री उत्पल मिश्र ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा के प्रसार में सामाजिक संस्थाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम के समापन पर आयोजित संवाद एवं प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। धन्यवाद ज्ञापन कबीर शान्ति मिशन के मुख्य समन्वयक श्री राजेश अग्रवाल ने प्रस्तुत किया राष्ट्रीय विमर्श का संचालन श्री व्रत देव पाण्डेय ने प्रभावशाली एवं गरिमामय ढंग से किया।यह राष्ट्रीय विमर्श भारतीय शिक्षा के मूल स्वरूप, पंचकोष आधारित व्यक्तित्व विकास, मूल्यपरक शिक्षा तथा विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल सिद्ध हुआ। कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षाविदों एवं प्रतिभागियों ने भारतीय शिक्षा दर्शन को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।




