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करिश्मा कपूर, जज, इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीज़न 5

सिनेमा से गहराई से जुड़ी एक फैमिली में पली-बढ़ी और सेट पर लीजेंडरी मास्टर्स के साथ काम करते हुए मैंने बहुत जल्दी समझ लिया था कि असली गुरु सिर्फ स्टेप्स नहीं सिखाते, वो आपको सिखाते हैं कि स्टेज को अपनी आत्मा से कैसे अपनाना है। इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीज़न 5 के कंटेस्टेंट्स का जुनून देखकर मुझे वही मार्गदर्शन याद आता है।

NIT-News मुंबई “सिनेमा से गहराई से जुड़ी एक फैमिली में पली-बढ़ी और सेट पर लीजेंडरी मास्टर्स के साथ काम करते हुए मैंने बहुत जल्दी समझ लिया था कि असली गुरु सिर्फ स्टेप्स नहीं सिखाते, वो आपको सिखाते हैं कि स्टेज को अपनी आत्मा से कैसे अपनाना है। इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीज़न 5 के कंटेस्टेंट्स का जुनून देखकर मुझे वही मार्गदर्शन याद आता है। इस गुरु पूर्णिमा पर मेरा दिल उन गुरुओं के लिए आभार से भरा है जिन्होंने मुझे पैरों से पहले दिल से नृत्य करना सिखाया, और मैं उम्मीद करती हूँ कि हम वही रोशनी इस सीज़न के हमारे शानदार टैलेंट तक पहुँचा सकें।” जावेद जाफरी, जज, इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीज़न 5
“मेरे लिए डांस हमेशा आज़ादी, रिद्म और अपनी आवाज़ खोजने का ज़रिया रहा है। शुरुआती दिनों के स्ट्रीट-स्टाइल से लेकर इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीज़न 5 के शानदार मंच तक, मैंने महसूस किया है कि असली गुरु आपकी झिझक को दूर करके आपके असली रूप को सामने लाते हैं। इस पावन गुरु पूर्णिमा के दिन मैं उन गुरुओं को नमन करता हूँ जिन्होंने मुझे रिद्म में ज़मीन से जोड़े रखा और मैं हर उस कोरियोग्राफर को सलाम करता हूँ जो हमारे शो पर निस्वार्थ भाव से ‘इंडिया वाला डांस’ का भविष्य गढ़ रहे हैं।”गीता कपूर, जज, इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीज़न 5
“शो पर मुझे ‘माँ’ कहा जाता है, लेकिन जो कुछ भी मैंने मेंटरशिप के बारे में सीखा है, वो उन दिग्गजों से है जिनके कंधों पर मैं खड़ी हूँ, खासकर मेरी मेंटर फराह खान से, जिन्होंने मुझे सिखाया कि टैलेंट को सख्त प्यार और खुले दिल से कैसे संवारना है। इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीज़न 5 सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं है, यह एक पवित्र गुरुकुल है जहाँ सपने पसीने, आँसुओं और अटूट विश्वास से आकार लेते हैं। इस गुरु पूर्णिमा पर मैं प्रार्थना करती हूँ कि हम अपने कंटेस्टेंट्स को उसी गर्मजोशी, सख्त अनुशासन और आशीर्वाद से मार्गदर्शन देते रहें जैसा हमारे गुरुओं ने हमें दिया।”
राजीव खंडेलवाल, होस्ट, तुम हो ना, “गुरु पूर्णिमा एक खूबसूरत और विनम्र याद दिलाती है कि सीखना कभी रुकता नहीं और हमारे सच्चे मार्गदर्शक अक्सर वही होते हैं जो हमारे सबसे करीब होते हैं। मेरे माता-पिता मेरे पहले गुरु रहे हैं। दुनिया में कदम रखने से बहुत पहले उन्होंने मुझे सोचने का तरीका और जीने के मूल्य सिखाए। उन्होंने मुझे ईमानदारी, करुणा और दृढ़ता के साथ दुनिया को देखना सिखाया और वही आधार आज भी मुझे स्थिर रखता है। जैसे-जैसे ज़िंदगी आगे बढ़ती है, हमें कई रूपों में गुरु मिलते हैं शिक्षक, मेंटर, निर्देशक, सहकर्मी, दोस्त और कभी-कभी बिल्कुल अजनबी लोग जिनकी यात्रा हमें गहरा असर देती है। हाल ही में, ‘तुम हो ना – घर की सुपरस्टार’ के प्रेरणादायक कंटेस्टेंट्स से बातचीत करना भी उतना ही समृद्ध रहा है।
उनकी कहानियाँ सुनकर मुझे नए दृष्टिकोण मिले और याद आया कि हर इंसान से हमें कुछ मूल्यवान सीखने को मिलता है। मैंने महसूस किया है कि हमारे सबसे बड़े गुरु अक्सर सबसे साधारण रूपों में आते हैं, हमें सबसे सरल और शुद्ध सच्चाइयों से मार्गदर्शन देते हैं। इस गुरु पूर्णिमा पर मैं अपने माता-पिता, उन रोज़मर्रा के सुपरस्टार्स और हर उस व्यक्ति के प्रति गहराई से आभारी हूँ जिन्होंने मुझे आज का इंसान बनाया।”

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