चेहल्लुम पर निकला दरिया वाला जुलूस
जौनपुर शहर के मौला अलीघाट, मुफ्ती मोहल्ला में 20 सफर के अवसर पर आयोजित ऐतिहासिक दरिया वाला जुलूस मंगलवार को पूरी अकीदत, गम और शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ।

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जौनपुर शहर के मौला अलीघाट, मुफ्ती मोहल्ला में 20 सफर के अवसर पर आयोजित ऐतिहासिक दरिया वाला जुलूस मंगलवार को पूरी अकीदत, गम और शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। बड़ी संख्या में मोमिनीन ने जुलूस में शिरकत कर हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला को अश्कों के साथ खिराज-ए-अकीदत पेश किया। जुलूस से पूर्व आयोजित मजलिस का आगाज मरहूम नजर हसन एडवोकेट के हमनवा जनाब सैय्यद मेहदी जैदी की सोजखवानी से हुआ। इसके बाद हुज्जतुल इस्लाम मौलाना महफूजुल हसन खाँ ने मजलिस को खिताब करते हुए कर्बला के पैगाम, सब्र, इंसाफ और शोहदाए कर्बला की अजीम कुर्बानियों पर से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन का गम केवल शिया समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि हर इंसानियत पसंद, न्यायप्रिय और सत्य का साथ देने वाले व्यक्ति का गम है। उन्होंने कहा कि कर्बला का पैगाम मजहबी सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानियत, अमन, भाईचारे, इंसाफ, सब्र और जुल्म के ख़िलाफ डटकर खड़े होने की सीख देता है। इमाम हुसैन ने अपने परिवार और साथियों की बेमिसाल कुर्बानी देकर हक और इंसाफ की राह पर डटे रहने का संदेश दिया, जो आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। मौलाना जीशान आजमी ने चेहलुम ने कहा कि नजफ से कर्बला तक हुसैनी मोकेब के माध्यम से जायरीन की निस्वार्थ सेवा, मेहमाननवाजी और इंसानियत की मिसाल पूरी दुनिया के सामने पेश होती है। उन्होंने बताया कि भारत से भी बड़ी संख्या में जायरीन अरबईन में शामिल होकर अमन, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देते हैं, जो भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और धार्मिक सौहार्द का प्रतीक है।मजलिस के बाद मातम के बीच मौला अलीघाट, मुफ्ती मोहल्ला से ऐतिहासिक दरिया वाला जुलूस अपने पारंपरिक मार्ग से रवाना हुआ। “या हुसैन” और “ऐ हुसैन” की सदाओं से पूरा इलाका गूंज उठा। महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों ने बड़ी संख्या में जुलूस में शिरकत की। जगह-जगह अकीदतमंदों ने जुलूस का इस्तकबाल किया तथा सबीलों का भी इंतजाम किया गया।




