उत्तर प्रदेश

शायर बशीर बद्र की याद में इत्तेहाद ए मिल्लत ने किया शोक सभा का आयोजन

सभा में लखनऊ के नामचीन शायरों, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, वरिष्ठ पत्रकारों, समाजसेवियों, साहित्यकारों तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों ने की शिरकत

NIT-News

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित यू.पी. प्रेस क्लब में इत्तेहाद ए मिल्लत के तत्वावधान में देश के मशहूर शायर बशीर बद्र की याद में एक भावपूर्ण शोक सभा का आयोजन किया गया।सभा का संचालन पी के तिवारी ने किया।शोक सभा का आयोजन सिराज मेंहदी,इंसराम अली और सर्वेश अस्थाना के द्वारा किया गया।यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं था, बल्कि अदब, इंसानियत और मोहब्बत के उस दौर को याद करने का अवसर था, जिसे बशीर बद्र ने अपनी शायरी से जीवंत बनाया।
सभा में लखनऊ के नामचीन शायरों, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, वरिष्ठ पत्रकारों, समाजसेवियों, साहित्यकारों तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों ने शिरकत कर महान शायर को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने बशीर बद्र के साहित्यिक योगदान, उनकी मानवीय संवेदनाओं और उनकी कालजयी शायरी को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर सिराज मेहंदी ने कहा कि”बशीर बद्र साहब उर्दू अदब की ऐसी बुलंद आवाज़ थे, जिन्होंने अपनी शायरी से मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम पूरी दुनिया तक पहुंचाया। उनके अशआर लोगों के दिलों की धड़कन बन गए थे। उनका निधन साहित्य जगत की ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। हम उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश करते हैं और उनकी यादों को हमेशा संजोकर रखेंगे।”
शोक सभा को संबोधित करते हुए इंसराम अली ने कहा कि
“बशीर बद्र साहब का जाना केवल उर्दू शायरी का नहीं, बल्कि पूरे मुल्क के सांस्कृतिक और साहित्यिक संसार का बड़ा नुकसान है। उन्होंने अपनी रचनाओं से समाज को प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। उनकी शायरी आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा मार्गदर्शक बनी रहेगी। अल्लाह उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।”
लोगों को संबोधित करते हुए सर्वेश अस्थाना ने कहा कि
“बशीर बद्र जी शब्दों के ऐसे जादूगर थे, जिन्होंने संवेदनाओं को नई ऊंचाइयां दीं। उनकी ग़ज़लों में जीवन का दर्द, प्रेम की गहराई और रिश्तों की गर्माहट साफ झलकती थी। उनके जाने से साहित्य और शायरी का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हुआ है। उनकी रचनाएं सदैव उन्हें हमारे बीच जीवित

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