लखनऊ

विकास की दौड़ में मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना बेहद जरूरी: बृजेश पाठक, मा. उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश। 

निर्वाण अस्पताल द्वारा आयोजित कांफ्रेंस में डिजिटल एडिक्शन, पेरेंटिंग और बदलती जीवनशैली पर एक्सपर्ट्स ने साझा किए अनुभव

गोविन्द प्रजापति 

• मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशेषज्ञों को किया गया सम्मान

 

एक 18 साल का युवा इस कदर गेम का एडिक्ट हो गया कि पहले उसने दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई छोड़ दी और उसके बाद कोटा में कोर्स से ड्रॉप आउट लेकर वापस घर आ गया। पैरेंट्स ने जब उसकी दिनचर्या पर करीब से नजर रखी तो पता चला कि वह दिन में 18 घंटे से अधिक समय गेम देखता और खेलता था। इस डिजिटल एडिक्शन ने लगभग उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी।

डिजिटल एडिक्शन से जुड़े ऐसे ही कई अलग-अलग दिलचस्प मुद्दों पर निर्वाण अस्पताल द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘साइकॉन 2026’ सम्मेलन में चर्चा की गई, जिसमें पेरेंट्स और बच्चों के रिश्तों से लेकर उनसे जुड़ी चुनौतियों पर भी बात की गई। इस दौरान एक्सपर्ट्स ने बताया कि कैसे छोटी उम्र से ही पेरेंट्स बच्चों की शरारत से निजात पाने के लिए या फिर खाना खाने जैसी दैनिक क्रियाएं पूरी करवाने के लिए मोबाइल फोन का सहारा लेते हैं। यह मोबाइल फोन धीरे-धीरे कब उनके बच्चों की लत बन जाता है, उन्हें पता ही नहीं चलता।ऐसी समस्याओं से बचने के लिए जरूरी है कि माता-पिता अपनी पेरेंटिंग की जिम्मेदारी को समझें। बच्चों को मोबाइल फोन पकड़ाने की बजाय उन्हें रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना अधिक जरूरी है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक और गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के कुलपति जयशंकर मिश्रा उपस्थित रहे।उप मुख्यमंत्री डॉ. बृजेश पाठक ने कहा कि 35 साल पहले युवाओं में सब्सटेंस एब्यूज को सुधारने के लिए ‘निर्वाण’ द्वारा की गई इस शुरुआत को मैंने करीब से देखा है। वर्तमान समय में बच्चों के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था बेहद आवश्यक हो गई है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमने तरक्की तो खूब की है, लेकिन उसके साथ-साथ जबरदस्त मानसिक दबाव के साथ जी रहे हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना जरूरी है। निर्वाण द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रमों की हम सराहना करते हैं। में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि एक स्टडी के अनुसार युवा प्रतिदिन 9 घंटे से अधिक मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसका असर उनकी मानसिक क्षमताओं पर पड़ रहा है। साथ ही पेरेंट्स को फिजिकल हाइजीन की तरह ही बच्चों के डिजिटल हाइजीन को भी सुनिश्चित करने की सलाह दी गई।

इन सत्रों में कई अहम विषयों पर सरल और दिलचस्प तरीके से चर्चा की गई। इनमें “डिजिटल एज में न्यूरोप्लास्टिसिटी”, “मनोवैज्ञानिक बीमारियों के इलाज में आरटीएमएस जैसी नई न्यूरोटेक्नोलॉजी की भूमिका”, “क्या तकनीक हमारी जिंदगी आसान बना रही है या हमारी पहचान मिटा रही है?”, “खामोश जजमेंट और शोर भरी स्क्रीन: डिजिटल पेरेंटिंग की दुविधा”, “स्क्रोलिंग के बीच बढ़ती खामोशी: वैवाहिक रिश्तों में अनदेखी दूरी” और “तकनीक के दौर में भावनाओं को संभालने की चुनौती” जैसे विषय शामिल रहे। इन सभी सत्रों में विशेषज्ञों ने डिजिटल जीवन, मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों पर तकनीक के बढ़ते प्रभाव को आसान भाषा में समझाने की कोशिश की।

‘साइकॉन 2026’ के दौरान मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई वरिष्ठ विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रो. (डॉ.) टी.बी. सिंह और प्रो. (डॉ.) कृष्ण दत्त को मनोविज्ञान के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए प्रदान किया गया। वहीं नशा मनोचिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रो. (डॉ.) पी.के. दलाल को सम्मानित किया गया।

जनरल साइकियाट्री में उल्लेखनीय कार्य के लिए डॉ. एच. नायडू को पुरस्कार मिला, जबकि बाल और किशोर मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए प्रो. (डॉ.) प्रभात सिथोले को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मनो-यौन स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. आर.के. ठकराल को भी सम्मान प्रदान किया गया।इसी क्रम में जेरियाट्रिक साइकियाट्री के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रो. (डॉ.) एस.सी. तिवारी को सम्मानित किया गया, जबकि साइकोथेरेपी और काउंसलिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. पल्लवी भटनागर को पुरस्कार दिया गया। रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए रिचमंड फेलोशिप सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ए.के. अग्रवाल को सम्मानित किया गया। व्यापक पेशेवर अनुभव और प्रशिक्षण के लिए प्रो. (डॉ.) अजय कोहली को सम्मान मिला। वहीं कम्युनिटी और सोशल साइकियाट्री के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. देवाशीष शुक्ला तथा पब्लिक मेंटल हेल्थ के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. पी.के. श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया।

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