उत्तर प्रदेश

100 प्रतिशत जलापूर्ति वाले गांवों में ग्राम पंचायतों को सौंपी जा रही व्यवस्था

विडियो कॉन्फ्रेसिंग में उत्तर प्रदेश की तरफ से जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत किए जाने वाले कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक नल से जल कनेक्शन देने वाला राज्य बन गया है।

गोविन्द प्रजापति/लखनऊ: जल जीवन मिशन-2.0 भविष्य में किस तरह से योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए आगे काम करेगा, कैसे ग्राम पंचायतों और स्थानीय जल समितियों की भागीदारी को बढ़ाया जाएगा। इन सभी मुद्दों को लेकर शुक्रवार को केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने सभी राज्यों के मंत्रियों और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिवों के साथ वर्चुअल माध्यम से मंथन किया। उत्तर प्रदेश की तरफ से इस बैठक में राज्य के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अपर मुख्य सचिव नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग अनुराग श्रीवास्तव ने प्रतिभाग किया। विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान केन्द्रीय जलशक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने जल जीवन मिशन-2.0 की रूपरेखा सभी राज्यों के सामने रखी। बताया गया कि भविष्य में किस तरह से योजना को लेकर कार्य किया जाना है। इसमें केन्द्र और राज्य की क्या भूमिका होगी। साथ ही राज्यों से सुझाव मांगे गए कि योजना को किस तरह से बेहतर ढंग से जमीन पर उतारा जा सकता है।
विडियो कॉन्फ्रेसिंग में उत्तर प्रदेश की तरफ से जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत किए जाने वाले कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक नल से जल कनेक्शन देने वाला राज्य बन गया है। प्रदेश में 2.43 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। विन्ध्य बुंदेलखंड क्षेत्र में 95 प्रतिशत से अधिक घरों तक नल से जल की सप्लाई की जा रही है। इसके अलावा 100 प्रतिशत जलापूर्ति वाले गांवों में जल अर्पण का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिसमें जलापूर्ति की पूरी व्यवस्था ग्राम पंचायत को हैंडओवर की जा रही है।
गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाते हुए, इसे जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में लागू करने की मंजूरी दे दी है। इस योजना पर कुल 8.69 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। नई व्यवस्था में डिजिटल निगरानी, ग्राम पंचायत की भागीदारी और जल आपूर्ति की टिकाऊ व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जाएगा।

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