अपनी मां के लिए पिता की तलाश: ‘बूंग’ कल से बड़े पर्दे पर
यह फिल्म न केवल एक बच्चे के साहस की कहानी है, बल्कि यह मणिपुर की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को भी एक अलग नजरिए से पेश करती है।

Puja vimal
मुम्बई,थियेट्रिकल रिलीज में अब बस एक दिन बचा है, और ‘बूंग’ के मेकर्स ने एक शानदार नया पोस्टर जारी करके एक्साइटमेंट और बढ़ा दी है। एक्सेल एंटरटेनमेंट, चॉकबोर्ड एंटरटेनमेंट और सूटेबल पिक्चर्स के साथ मिलकर बनी यह फिल्म कल, 6 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार ‘बूंग’ की रिलीज भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, क्योंकि हाल ही में यह फिल्म प्रतिष्ठित ब्रिटिश एकेडमी फिल्म अवॉर्ड्स (BAFTA) जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी है। इस सम्मान ने मणिपुरी भाषा की इस फिल्म को ग्लोबल स्टेज पर ला खड़ा किया है और भारत की क्षेत्रीय कहानियों की ताकत को दुनिया के सामने रखा है। लक्ष्मीप्रिया देवी द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म का प्रीमियर सबसे पहले टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था। इसके बाद इसने वारसॉ, साओ पाउलो, एडिलेड और तेलिन ब्लैक नाइट्स जैसे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स का शानदार सफर तय किया। हर जगह इस फिल्म ने अपनी सादगी और दिल को छू लेने वाली कहानी की वजह से एक अलग पहचान बनाई।’बूंग’ एक मणिपुरी कहानी है जो एक छोटे लड़के (गुगुन किपगेन द्वारा निभाया गया किरदार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने टूटे हुए परिवार को फिर से एक करना चाहता है। बूंग की परवरिश उसकी सिंगल मदर मंदाकिनी (बाला हिजाम निंगथौजम) ने की है। वह अपने लापता पिता को खोजने के लिए अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ एक भावुक सफर पर निकलता है। यह फिल्म उम्मीद, जुझारूपन और माँ-बेटे के अटूट रिश्ते जैसे बेहद महत्वपूर्ण विषयों को छूती है।



