उत्तर प्रदेश

बाढ़ से काशी में बढ़ीं मुश्किलें: घाटों पर भरा पानी, नाव से अंतिम संस्कार के लिए ले जाए जा रहे शव

गंगा का जलस्तर दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। गंगा खतरे के निशान को छूने को आतुर हैं। बृहस्पतिवार को जलस्तर बढ़ कर 70.68 मीटर दर्ज किया गया। अब जलस्तर खतरे के निशान से महज 0.58 मीटर ही नीचे है। जिला प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जलस्तर में पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है। गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों में रहने वालों की परेशानियां बढ़ा दी हैं।अब तक 566 परिवारों और 1381 लोग अपने घरों को छोड़ शेल्टर होम में शिफ्ट हो गए हैं। इनके अलावा 3843 लोग अपने रिश्तेदारों, परिचितों या किराये के मकान में शिफ्ट हैं। 

NIT-News गंगा का जलस्तर दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। गंगा खतरे के निशान को छूने को आतुर हैं। बृहस्पतिवार को जलस्तर बढ़ कर 70.68 मीटर दर्ज किया गया। अब जलस्तर खतरे के निशान से महज 0.58 मीटर ही नीचे है। जिला प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जलस्तर में पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है। गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों में रहने वालों की परेशानियां बढ़ा दी हैं।अब तक 566 परिवारों और 1381 लोग अपने घरों को छोड़ शेल्टर होम में शिफ्ट हो गए हैं। इनके अलावा 3843 लोग अपने रिश्तेदारों, परिचितों या किराये के मकान में शिफ्ट हैं। बाढ़ के कारण शवों को मणिकर्णिका घाट तक लाना भी दुश्वार हो गया है। शमशान तक पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। शवयात्री को गंदगी, कीचड़, मलबे और कंधे तक पानी से गुजरना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में शवदाह हो रहा है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही एसटीपी के बंद होने का खतरा बढ़ गया है। वर्तमान में बाढ़ में एसटीपी संचालन धीमी गति से हो रहा है। बाढ़ के दौरान सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का संचालन अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। जलस्तर खतरे का निशान पार होने के बाद बैकफ्लो (उल्टा बहाव) होने लगता है। इससे अधिकांश निचले इलाकों में स्थित एसटीपी को बंद करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, सीवर में भारी मात्रा में बारिश का पानी और गाद घुसने से प्लांट के ओवरलोड होने का खतरा रहता है। जल निगम के अधिशासी अभियंता एके सिंह ने बताया कि सभी एसटीपी काम कर रहे हैं। अभी गंगा खतरे के निशान से नीचे बह रही है। खतरे का निशान पार होने पर दिक्कत बढ़ सकती है। रामेश्वर मठ में आधा फीट घुसा बाढ़ का पानी गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद नगवा नाला में पानी बढ़ने के बाद पानी रामेश्वर मठ में प्रवेश कर गया। बृहस्पतिवार भोर में मठ के भीतर पानी घुस गया। करीब आधा फीट पानी मठ के निचले तल में लग गया है। मठ में रहकर पढ़ने वाले छात्रों को रामेश्वर मठ से दूसरे जगह शिफ्ट कर दिया गया। आधा फीट पानी और बढ़ा तो नगवा हरिजन बस्ती सोनकर बस्ती में और नाले के किनारे बने घरों में पानी घुस जाएगा। वहीं, सीर गोवर्धनपुर वार्ड में मारुति नगर कॉलोनी में पानी का दबाव बढ़ने से गुलाब लाॅज के पास नाला भर गया। नाला भरने के बाद 24 के करीब मकान के अगल-बगल एक से दो फीट पानी भर गया है। काॅलोनी में पानी भरने के बाद बिजली सप्लाई बंद होने से लोग परेशान हैं।
पिपरी गांव के राजभर बस्ती से पलायन शुरू नाद नदी व गोमती नदी के बीच बसा पिपरी गांव चारों तरफ बाढ़ के पानी से घिर गया है। मठिया गांव से पिपरी, धौरहरा से बेला मार्ग पर पानी भर जाने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। बृहस्पतिवार को दो नावों से राजभर बस्ती के लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है। यहां के लोग हरिहरपुर गांव पहुंच रहे हैं। वहीं, चिरईगांव के रामपुर की दलित बस्ती में छह परिवारों ने रामपुर प्राथमिक विद्यालय में राहत शिविर में शरण ली। बाढ़ से 227 किसानों की करीब 250 बीघा फसल प्रभावित गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ बाढ़ का पानी खेतों तक पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ से जिले में 227 किसानों की करीब 250 बीघा फसल प्रभावित हुई है। प्रशासन की दो सितंबर की बाढ़ रिपोर्ट में कृषि नुकसान का पूरा आंकड़ा दर्ज किया गया है। प्रभावित किसानों के सामने अब फसल बचाने के साथ ही नुकसान की भरपाई की चिंता खड़ी हो गई है। बाढ़ से प्रभावित गांवों में रामपुर ढाब, मोकलपुर, गोबरहा, लक्ष्मीसेंपुर, दुदुवा, पिपरी, टेकुरी, चितौनी, तड़िया, कोटवा, कोरौत, धरहरा, लुठा और अंबा शामिल हैं। प्रशासन ने इन 14 गांवों को कृषि प्रभावित श्रेणी में दर्ज किया है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रभावित 227 किसानों की करीब 250 बीघा फसल प्रभावित हुई है। रिपोर्ट में भूमि कटाव का आंकड़ा शून्य दर्ज किया गया है। बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए अब फसल क्षति के आकलन और राहत की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। शैलपुत्री-सरैया में बाढ़ पीड़ितों से मिले राज्यमंत्री, बांटी राहत सामग्री और जाना हाल राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल बृहस्पतिवार की देर शाम बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे। उन्होंने शैलपुत्री और सरैया क्षेत्र में प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हाल जाना और राहत सामग्री वितरित की। राहत शिविर में छोटे बच्चों को चॉकलेट और बिस्किट देकर दुलार किया और उन्हें खूब पढ़ाई करने की नसीहत दी। राज्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत और सहायता उपलब्ध कराने में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। शिविरों में रह रहे परिवारों के लिए भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है।

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