उत्तर प्रदेश

कमाल अख्तर का राजनीतिक सफर जानिए 

उन्होंने दिल्ली जामिया मिल्लिया इस्लामिया से अपनी बी.ए. (ऑनर्स) अर्थशास्त्र और एलएलबी की पढ़ाई की, इसके बाद वह राजनीति में आ गए और शुरुआत समाजवादी पार्टी से ही की।

नौयर आज़म 

अमरोहा जनपद के उझारी गांव में 24 अक्टूबर 1971 को नफीसुद्दीन अहमद और महजबीन के घर पर कमाल अख्तर का जन्म हुआ था। उन्होंने दिल्ली जामिया मिल्लिया इस्लामिया से अपनी बी.ए. (ऑनर्स) अर्थशास्त्र और एलएलबी की पढ़ाई की, इसके बाद वह राजनीति में आ गए और शुरुआत समाजवादी पार्टी से ही की।

कमाल अख्तर को राजनीति विरासत में मिली उनके पिता नफीसुद्दीन अहमद लगातार तीन बार उझारी गांव के प्रधान रहे, इसके बाद 1988-93 में वह उझारी नगर पंचायत के चेयरमैन रहे, कमाल अख्तर की मां महजबीन तीन बार (2002, 2007 और 2012) में उझारी नगर पंचायत की चेयरमैन रहीं, इसके बाद कमाल अख्तर की पत्नी हुमेरा अख्तर भी अध्यक्ष बनीं।

कमाल अख्तर की राजनीति में एंट्री खुद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने कराई थी, मुलायम ने कमाल अख्तर के राजनीतिक कौशल को देखते हुए उन्हें समाजवादी युवजन सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया था इसके बाद कमाल अख्तर ने सपा युवजन सभा के विस्तार में अहम भूमिका निभाई।

सपा से 2004 में कमाल अख्तर राज्यसभा भेजा गया, कमाल अख्तर का राजनीतिक जीवन की शुरुआत सीधे बतौर राज्यसभा सदस्य हुई।

सपा ने 2012 में कमाल अख्तर को अमरोहा की हसनपुर सीट से मैदान में उतारा, कमाल अख्तर ने जीत दर्ज की और उन्हें पंचायती राज मंत्री बना दिया गया, इसी बीच 2014 का लोकसभा चुनाव आया और सपा ने कमाल अख्तर की पत्नी हुमेरा अख्तर को अमरोहा सीट से चुनाव लड़ा दिया, हुमेरा 3.70 लाख वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहीं।

कमाल अख्तर को 2015 में अखिलेश यादव ने खाद्य एवं रसद विभाग का कैबिनेट मंत्री बना दिया, इसके बाद 2017 का चुनाव भी कमाल अख्तर ने हसनपुर सीट से लड़ा, लेकिन वह 27 हजार से अधिक वोटों से चुनाव हार गए।

कमाल अख्तर को सपा ने 2022 में मुरादाबाद जनपद की कांठ विधानसभा से टिकट दिया कलाम अख्तर ने जीत दर्ज किया विधायक बने। कमला अख्तर अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं।

कमाल अख्तर का कौन-कौन समर्थक है इन्हें अपना नेता मानते हैं।

 

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