उत्तर प्रदेश

पसमांदा समाज के दुश्मनों को बेनकाब करेंगे अनीस मंसूरी

पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली के हालिया बयान पर कड़ा प्रहार

Nayer Azam /लखनऊ। पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली के हालिया बयान पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे पसमांदा समाज के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात करार दिया है। अनीस मंसूरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो लोग मुसलमानों को जनगणना में ‘जाति’ बताने से रोक रहे हैं, वे असल में आरएसएस और उन ताकतों के एजेंट हैं जो नहीं चाहते कि पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण या सरकारी योजनाओं का लाभ मिले। मंसूरी ने कहा कि हमने उत्तर प्रदेश से लेकर देश के कोने-कोने तक जिस जातिगत जनगणना के लिए सड़कों पर खून बहाया और आंदोलन खड़ा किया, उसे मौलाना जैसे लोग एक बंद कमरे में बैठकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। मौलाना खालिद रशीद का यह कहना कि मुसलमान अपनी जाति न लिखवाएं, सीधे तौर पर पसमांदा समाज के पैरों में बेड़ियाँ डालने जैसा है। ​अनीस मंसूरी ने तीखे लहजे में सवाल किया कि आखिर मौलाना और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को पिछड़े मुसलमानों की गिनती से इतनी चिढ़ क्यों है? क्या उन्हें डर है कि अगर धोबी, हजाम, मंसूरी, राईन, अंसारी, फ़क़ीर , जोगी, सैफी, इदरीसी, मनिहार, हलवाई, घोसी, गद्दी, कुरैशी जैसे कुल पिछड़ी मुस्लिम बिरादरी संख्या सामने आ गई, तो कौम के रहनुमा बनकर बैठे मुट्ठी भर ‘अशराफ’ (ऊंची जाति) के लोगों की दुकानें बंद हो जाएंगी? उन्होंने कहा कि मजहब और उर्दू के नाम पर पसमांदाओं को भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करने का दौर अब खत्म हो चुका है। मौलाना का बयान न केवल भ्रमित करने वाला है, बल्कि यह पसमांदा आंदोलन को कुचलने की एक गहरी साजिश है। अनीस मंसूरी ने साफ कर दिया कि पसमांदा समाज अब किसी मौलाना या बोर्ड के फतवे में नहीं आने वाला। हम अपनी जाति भी लिखवाएंगे और अपना हक भी छीनकर लेंगे। जो लोग हमारे संवैधानिक हक की राह में रोड़ा बनेंगे, उन्हें इतिहास कभी माफ नहीं करेगा और पसमांदा समाज ऐसे चेहरों को बेनकाब करके दम लेगा।

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