खड़ंजा, इंटरलॉकिंग, हैंडपंप रिबोर और मनरेगा में खर्च का मांगा पूरा हिसाब, पारदर्शिता पर घिरा पंचायत प्रशासन
विकास खंड बीकापुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खिद्दिरपुर में विकास कार्यों को लेकर अब पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। गांव के निवासी राजेन्द्र यादव ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत खंड विकास अधिकारी बीकापुर से विस्तृत जानकारी मांगकर पूरे मामले को गरमा दिया है।

न्यू इनफार्मेशन टुडे – न्यूज
लखनऊ/अयोध्या। विकास खंड बीकापुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खिद्दिरपुर में विकास कार्यों को लेकर अब पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। गांव के निवासी राजेन्द्र यादव ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत खंड विकास अधिकारी बीकापुर से विस्तृत जानकारी मांगकर पूरे मामले को गरमा दिया है।
आवेदन में वर्ष 01 जनवरी 2024 से 30 मार्च 2026 तक कराए गए सभी खड़ंजा और इंटरलॉकिंग कार्यों का पूरा ब्यौरा मांगा गया है। इसमें कार्यों के स्थान, स्वीकृति और पूर्णता तिथि के साथ-साथ मजदूरों के नाम, उनके कार्य दिवस और मास्टर रोल की प्रमाणित प्रतियां भी शामिल हैं। इससे साफ है कि गांव में हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
इतना ही नहीं, गांव में कराए गए नल और हैंडपंप रिबोर कार्यों पर हुए खर्च और उनकी संख्या को लेकर भी जानकारी मांगी गई है। प्रत्येक कार्य का स्थान और उस पर हुए कुल व्यय का हिसाब मांगते हुए संबंधित अभिलेखों की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई है। मनरेगा योजना को लेकर भी आवेदन में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जॉब कार्ड धारकों की सूची, उन्हें मिले रोजगार के दिन, भुगतान की तिथि और राशि के साथ मस्टर रोल की प्रतियां मांगी गई हैं। इससे मनरेगा में संभावित गड़बड़ियों की आशंका जताई जा रही है। ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर दायर इस आरटीआई आवेदन से स्थानीय प्रशासन में हलचल मच गई है। अब देखना होगा कि खंड विकास अधिकारी द्वारा मांगी गई सूचनाएं समय पर उपलब्ध कराई जाती हैं या नहीं। संभावित एंगल
अगर सूचनाओं में गड़बड़ी सामने आती है तो ग्राम पंचायत स्तर पर बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है।


