समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का आरोप, मतदाताओं को नोटिस भेजना ‘वोटबंदी अभियान

दिनेश कुमार प्रजापति
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बड़े पैमाने पर मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने को नोटबंदी के बाद भाजपा सरकार का नया ‘वोटबंदी अभियान’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीयत पहले भी ठीक नहीं थी और अब भी ठीक नहीं है। उनके अनुसार पहले केवल मुसलमानों को कागज़ों के नाम पर परेशान किया जाता था, लेकिन अब हिंदुओं को भी लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ लोग यह दावा कर रहे थे कि गलत वोट पकड़े जाने पर लोगों को डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा, तो क्या अब वोट के आधार पर नागरिकता तय की जाएगी और लोगों को उनके खेत, जमीन और घरों से बेदखल किया जाएगा?अखिलेश यादव ने कहा कि जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के परिजनों को ही नकार दिया गया तो आम लोगों की स्थिति क्या होगी। उन्होंने आशंका जताई कि यदि किसी के पास वोटर कार्ड न हो तो उसके परिवार के बुजुर्गों और बच्चों के हक-अधिकार, विरासत, जायदाद और जमा-पूंजी पर संकट खड़ा हो सकता है, जिससे लोग लगातार तनाव और चिंता में रहेंगे।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपनी बेईमानी और गलत नीतियों के कारण जनाधार खो चुकी है और अब उसे केवल धांधली का सहारा रह गया है। उनके मुताबिक तथाकथित पन्ना प्रमुख भी जनता का सामना करने से बच रहे हैं, क्योंकि महंगाई, बेरोजगारी और बेकारी के कारण जनता में भारी असंतोष है। उन्होंने कहा कि जनता यह सवाल उठा रही है कि जिन दस्तावेजों के आधार पर पहले वोटर सूची में नाम जोड़े गए थे, उन्हीं दस्तावेजों के रहते अब त्रुटियां कैसे सामने आ गईं और क्या गारंटी है कि आगे फिर गलती नहीं होगी। उनका कहना था कि यदि त्रुटि हुई है तो वह चुनाव आयोग की ओर से हुई है, लेकिन उसे सुधारने के लिए जनता को अपना काम छोड़कर दौड़ना पड़ रहा है।अखिलेश यादव ने इसे पीडीए के वोट काटने का बड़ा षड्यंत्र बताया और कहा कि यदि मतदाता सजग रहा तो अपना नाम जुड़वा लेगा, अन्यथा प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण पीछे हट सकता है। उन्होंने पीडीए प्रहरियों और ईमानदार बीएलओ की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सतर्कता से भाजपा और उसके सहयोगी अपनी मंशा में सफल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि एक भी झूठा वोट न जुड़ने पाए और एक भी सही वोट न कटने पाए।



