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ईरान का कड़ा कदम : यूरोपीय संघ की सेनाओं को आतंकी घोषित किया, परमाणु मुद्दे पर बढ़ा तनाव

ईरान ,22  फरवरी । ईरान ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की नौसेना और वायु सेना को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह कदम वर्ष 2019 में यूरोपीय संघ द्वारा ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के जवाब में उठाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत बताई गई कार्रवाई
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यूरोपीय संघ द्वारा आईआरजीसी के खिलाफ की गई कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों के विरुद्ध है। मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय पारस्परिक जवाबी कार्रवाई के तहत लिया गया है। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि 2019 में अमेरिका द्वारा आईआरजीसी को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के बाद ईरान ने पारस्परिक कार्रवाई संबंधी कानून के अनुच्छेद 7 के तहत यह कदम उठाया है। इस कानून के अनुसार, जो भी देश अमेरिका के इस निर्णय का समर्थन या अनुसरण करेगा, उसके खिलाफ ईरान पारस्परिक कार्रवाई करेगा।
ढ्ढस्ढ्ढस् और अल-कायदा की श्रेणी में रखा गया
यूरोपीय संघ द्वारा आईआरजीसी को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के बाद इसे इस्लामिक स्टेट (ढ्ढह्यद्यड्डद्वद्बष् स्ह्लड्डह्लद्ग) और अल-कायदा (्रद्य-क्तड्डद्गस्रड्ड) जैसी आतंकी संगठनों की श्रेणी में रखा गया है। इस निर्णय के बाद दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम में अहम भूमिका
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद स्थापित आईआरजीसी ईरान की शिया धार्मिक व्यवस्था की रक्षा के लिए गठित की गई थी। समय के साथ इस संगठन ने देश की अर्थव्यवस्था और सशस्त्र बलों में व्यापक प्रभाव स्थापित कर लिया। आईआरजीसी ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों की देखरेख में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अमेरिका और इजरायल का बढ़ता दबाव
इस बीच अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देश ईरान पर यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम रोकने के लिए दबाव बनाए हुए हैं। इन देशों ने ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिशों को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ष्ठशठ्ठड्डद्यस्र ञ्जह्म्ह्वद्वश्च ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह 10 से 15 दिनों के भीतर परमाणु समझौते पर अमेरिका के साथ सहमति बनाए, अन्यथा परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

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