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लखनऊ में उन्नत मिर्गी सर्जरी पर जागरूकता कार्यक्रम

लखनऊ में आयोजित जन-जागरूकता कार्यक्रम में अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, कोच्चि के एडवांस्ड एपिलेप्सी सेंटर के निदेशक डॉ. सिबी गोपीनाथ और मेदांता हॉस्पिटल के डायरेक्टर न्यूरोलॉजी डॉ. अनूप कुमार ठक्कर ने मिर्गी सर्जरी के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

एन0आई 0टी0 न्यूज

लखनऊ, : मिर्गी को लेकर समाज में आज भी कई तरह के भ्रम और डर मौजूद हैं, जबकि यह मस्तिष्क से जुड़ा सामान्य रोग है जिसका इलाज संभव है। इसी उद्देश्य से लखनऊ में आयोजित जन-जागरूकता कार्यक्रम में अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, कोच्चि के एडवांस्ड एपिलेप्सी सेंटर के निदेशक डॉ. सिबी गोपीनाथ और मेदांता हॉस्पिटल के डायरेक्टर न्यूरोलॉजी डॉ. अनूप कुमार ठक्कर ने मिर्गी सर्जरी के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।भारत में लगभग 1.50 करोड़ लोग मिर्गी से प्रभावित हैं। अच्छी बात यह है कि सही दवाओं से 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों में दौरे पूरी तरह नियंत्रित हो जाते हैं। लेकिन लगभग 30 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जिन के लिए दवाएं असर नहीं करतीं। ऐसे मामलों में सर्जरी सुरक्षित और प्रभावी विकल्प हो सकती है।
डॉ. सिबी गोपीनाथ ने कहा, “मिर्गी सर्जरी डरने की नहीं, समझने की जरूरत है। सही जांच के बाद चुने गए मरीजों में सर्जरी से दौरा-मुक्त जीवन संभव है। कई मरीजों में ऑपरेशन के बाद दवाएं भी धीरे-धीरे बंद की जा सकती हैं।”डॉ अनूप कुमार ठक्कर ने बताया, “जहां दवाएं काम न करें, वहां मिर्गी सर्जरी आशा देती है। यह खर्च नहीं, जीवन में निवेश है। हम पहले यह सुनिश्चित करते हैं कि दौरे मस्तिष्क के किस हिस्से से शुरू हो रहे हैं, फिर उसी के अनुसार इलाज की योजना बनाई जाती है।”विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर चार में से तीन मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता। अंधविश्वास, सामाजिक कलंक और जानकारी की कमी इसके बड़े कारण हैं। अनुमान है कि देश में लगभग 50 लाख मरीज सर्जरी के योग्य हो सकते हैं लेकिन हर साल केवल करीब 1,000 सर्जरी ही हो पाती हैं।
आधुनिक जांच तकनीकों से यह पता लगाया जा सकता है कि दौरे मस्तिष्क के किस हिस्से से शुरू हो रहे हैं लेकिन ऐसी सुविधाएँ देश के गिने-चुने उन्नत केंद्रों तक सीमित हैं। दूरी, खर्च और स्थानीय संसाधनों की कमी के कारण अधिकांश मरीज वहाँ पहुँच नहीं पाते। अनुमान है कि देश में लगभग 50 लाख लोग सर्जरी के योग्य हो सकते हैं इसलिए जागरूकता बेहद ज़रूरी है।
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि हर मिर्गी लाइलाज नहीं होती। सही समय पर सही केंद्र में जांच और परामर्श से हजारों मरीज सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं। लखनऊ में विशेषज्ञों की यह पहल उत्तर भारत में उन्नत मिर्गी सर्जरी सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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