घोसी मिल के किसानों का स्थानांतरण से किसान आक्रोशित, सठियांव जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी
किसान संगठनों ने प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और स्थानीय स्तर पर ही कोई समाधान निकालने की मांग की है।

Dinesh Kumar Prajapati
मऊ जनपद की घोसी स्थित दी किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड से संबद्ध गन्ना किसानों की पेराई व्यवस्था को अब दी किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड, सठियांव में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस निर्णय से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि अब उनके गन्ने की खरीद और भुगतान सठियांव मिल द्वारा किया जाएगा। इस जानकारी के बाद क्षेत्र के गन्ना किसानों में आक्रोश व्याप्त हो गया है, वहीं किसान नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने इसे किसानों के साथ अन्यायपूर्ण बताया है। घोसी मिल ने बीते 4 दिसंबर को 18 लाख कुंतल गन्ना पेराई के लक्ष्य के साथ सत्र का शुभारंभ किया था। उद्घाटन कार्यक्रम में नगर विकास व ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा भी मौजूद थे। मिल प्रबंधन के अनुसार, 17 फरवरी तक 71 क्रॉप डे में कुल 196 घंटे मिल बंद रही। इस अवधि में 17.34 लाख कुंतल जारी इंडेंट के सापेक्ष केवल 11.68 लाख कुंतल गन्ने की ही पेराई हो सकी, जबकि 5.81 लाख कुंतल गन्ना सट्टा अवशेष रह गया। प्रबंधन का कहना है कि शेष सत्र में लगभग 3.10 लाख कुंतल अतिरिक्त गन्ना उपलब्ध होने की संभावना है। हालांकि, मिल की पुरानी यांत्रिक व्यवस्था के कारण पूर्ण क्षमता से संचालन संभव नहीं हो पा रहा है। इससे गन्ना स्टेल हो रहा है, टीएआई बढ़ रही है और रिकवरी घटने से मिल को आर्थिक नुकसान की आशंका है।




