लखनऊ

गोविन्द प्रजापति/आर.डी.एस.ओ. में 20 अप्रैल 2026 को नवनिर्मित हिंदी पुस्तकालय ‘संकल्प’ का उद्घाटन महानिदेशक श्री प्रभास दनसाना द्वारा किया गया। अभिकल्प-भवन के भूतल पर स्थापित यह पुस्तकालय अब पाठकों के लिए एक ऐसा मंच बनेगा, जहाँ ज्ञान, कौशल और संवेदनशील सोच, तीनों का संतुलित विकास संभव होगा। डॉ. वीणा कुमारी वर्मा, मुख्य राजभाषा अधिकारी, आर.डी.एस.ओ. ने पुस्तकालय की कार्य-प्रणाली समझाते हुए बताया कि यह केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि पाठकों की जरूरतों के अनुसार ज्ञान का एक व्यवस्थित और उपयोगी केंद्र है। महानिदेशक श्री दनसाना ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि डिजिटल दौर में भी पुस्तकालय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें हमें गहराई से सोचने, बेहतर निर्णय लेने और मानवीय मूल्यों को समझने की क्षमता देती हैं, जो किसी भी व्यक्ति के करियर और व्यक्तित्व विकास के लिए अनिवार्य है। पाठकों के अधिकतम लाभ के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि पुस्तकालय में नियमित साहित्यिक संगोष्ठियाँ आयोजित हों और विभिन्न निदेशालयों की तकनीकी बुलेटिन भी उपलब्ध कराई जाएँ। इससे पाठकों को एक ही स्थान पर साहित्यिक और तकनीकी दोनों प्रकार का ज्ञान मिलेगा, जो उनके पेशेवर विकास में सहायक होगा। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने भी पुस्तकालय को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए अपने सुझाव दिए। ‘संकल्प’ हिंदी पुस्तकालय अब केवल पढ़ने का स्थान नहीं, बल्कि सीखने, सोचने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला एक सशक्त ज्ञान-केंद्र बनकर उभरेगा।

आर.डी.एस.ओ. में 20 अप्रैल 2026 को नवनिर्मित हिंदी पुस्तकालय ‘संकल्प’ का उद्घाटन महानिदेशक श्री प्रभास दनसाना द्वारा किया गया। अभिकल्प-भवन के भूतल पर स्थापित यह पुस्तकालय अब पाठकों के लिए एक ऐसा मंच बनेगा, जहाँ ज्ञान, कौशल और संवेदनशील सोच, तीनों का संतुलित विकास संभव होगा। डॉ. वीणा कुमारी वर्मा, मुख्य राजभाषा अधिकारी, आर.डी.एस.ओ. ने पुस्तकालय की कार्य-प्रणाली समझाते हुए बताया

गोविन्द प्रजापति/आर.डी.एस.ओ. में 20 अप्रैल 2026 को नवनिर्मित हिंदी पुस्तकालय ‘संकल्प’ का उद्घाटन महानिदेशक श्री प्रभास दनसाना द्वारा किया गया। अभिकल्प-भवन के भूतल पर स्थापित यह पुस्तकालय अब पाठकों के लिए एक ऐसा मंच बनेगा, जहाँ ज्ञान, कौशल और संवेदनशील सोच, तीनों का संतुलित विकास संभव होगा। डॉ. वीणा कुमारी वर्मा, मुख्य राजभाषा अधिकारी, आर.डी.एस.ओ. ने पुस्तकालय की कार्य-प्रणाली समझाते हुए बताया कि यह केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि पाठकों की जरूरतों के अनुसार ज्ञान का एक व्यवस्थित और उपयोगी केंद्र है।
महानिदेशक श्री दनसाना ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि डिजिटल दौर में भी पुस्तकालय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें हमें गहराई से सोचने, बेहतर निर्णय लेने और मानवीय मूल्यों को समझने की क्षमता देती हैं, जो किसी भी व्यक्ति के करियर और व्यक्तित्व विकास के लिए अनिवार्य है। पाठकों के अधिकतम लाभ के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि पुस्तकालय में नियमित साहित्यिक संगोष्ठियाँ आयोजित हों और विभिन्न निदेशालयों की तकनीकी बुलेटिन भी उपलब्ध कराई जाएँ। इससे पाठकों को एक ही स्थान पर साहित्यिक और तकनीकी दोनों प्रकार का ज्ञान मिलेगा, जो उनके पेशेवर विकास में सहायक होगा।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने भी पुस्तकालय को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए अपने सुझाव दिए। ‘संकल्प’ हिंदी पुस्तकालय अब केवल पढ़ने का स्थान नहीं, बल्कि सीखने, सोचने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला एक सशक्त ज्ञान-केंद्र बनकर उभरेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button