शिव क्या है: यथार्थ

विष पी कर अमृत देना है शिव
खुद मर कर जीवन देना है शिव

कुछ भी ना पाना है शिव
सब कुछ भी पाना है शिव

सागर की गहराई है शिव
हिमालय की ऊंचाई है शिव

ब्रह्मांड की आवाज़ है शिव
ब्रह्मांड का आरंभ है शिव

संगीत का मूल है शिव
नृत्य कला का मूल है शिव

ब्रह्मा है शिव ब्रह्म है शिव
जीवन है शिव मृत्यु है शिव

पशुपतिनाथ है शिव
क्रोधी महाकाल है शिव

सत्य है शिव सुंदर है शिव
कुछ नहीं और सबकुछ है शिव

कुछ न रख कर सब देना शिव
हलाहल विष हर लेना शिव

जीवन के हर कठिनाई में
हाथ थाम कर चलने वाला शिव

नंदी के नाथ वो विश्वनाथ
वो मां पार्वती के दीनानाथ

वो गंगा के स्त्रोत मस्तक पर चंद्र
वो शून्य है और वही अनंत

सब कुछ समझ जाना है शिव
कुछ भी न समझ पाना है शिव

त्याग शिव – वैराग्य शिव
हर पशु शिव हर इंसान शिव

हर हर हर हर की बोली सुन कर
मुख पर जो मुस्कान – शिव

वो आदि शिव अनादि शिव
वो अंत शिव अनंत शिव

वो हर जिह्वा जिसका नाम पुकारे
शिव.. शिव.. शिव.. शिव…….

जय शिव शंभू 🙏🏻

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