आरडीएसओ–जीएसवी–एनएमएल के बीच ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता, 23 मार्च 2026 को सहयोग का नया अध्याय शुरू
आरडीएसओ–जीएसवी–एनएमएल का त्रिपक्षीय एमओयू: रेलवे और धातुकर्म में नवाचार, आत्मनिर्भरता व उत्कृष्टता की नई दिशा

गोविन्द प्रजापति
रेलवे और धातुकर्म क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आज 23 मार्च को अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (आरडीएसओ), गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) और सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के साथ उठाया गया।
इस रणनीतिक सहयोग का उद्देश्य भारत के प्रमुख रेलवे अनुसंधान संगठन, परिवहन और रसद में उभरते विशिष्ट विश्वविद्यालय और एक अग्रणी धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला की विशेषज्ञता को समन्वित करना है।
एमओयू में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, प्रयोगशाला और परीक्षण सुविधाओं को साझा करने, मानकों और विशिष्टताओं के विकास और कार्यशालाओं, सेमिनारों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की परिकल्पना की गई है। यह सहयोग भारतीय रेलवे द्वारा सामना की जाने वाली महत्वपूर्ण चुनौतियों, जिनमें सामग्री क्षरण, विफलता निवारण और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाना शामिल है, के समाधान पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
श्री प्रभास दनसाना, महानिदेशक/आरडीएसओ, प्रोफेसर मनोज चौधरी, कुलपति/जीएसवी और डॉ. संदीप घोष चौधरी, निदेशक/एनएमएल ने नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक शक्तियों का लाभ उठाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह साझेदारी रेलवे संचालन में सुरक्षा, दक्षता और स्थिरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
यह सहयोग स्वदेशी अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करके, तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर और आत्मनिर्भर भारत के विज़न को आगे बढ़ाने के साथ साथ राष्ट्रीय विकास में योगदान देने में भी अहम भूमिका निभाएगा।




