राजनीति

कमजोर पटरियों पर दौड़ रही लखनऊ मेट्रो: स्पीड सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं, GDA पर भी उठाए सवाल

लखनऊ मेट्रो में रेल की पटरियां निर्धारित मानकों से कमजोर हैं। मेट्रो कॉरपोरेशन ने स्पीड लिमिट के प्रमाण पत्र का नवीनीकरण कराए बिना ही मेट्रो का संचालन कर यात्रियों की सुरक्षा को भी जोखिम में डाला है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। CAG ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के क्षेत्र के विकास से लेकर गरीबों को भूखंड आवंटन पर भी सवाल उठाए हैं।

वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने शुक्रवार को बजट सत्र के आखिरी अंतिम दिन विधानसभा में लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन और GDA की CAG रिपोर्ट पेश की। 2017से 2022 तक के कार्यकाल की CAG रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।

मेट्रो की रेल पटरियां कमजोर CAG रिपोर्ट के मुताबिक, आईआईटी कानपुर ने लखनऊ मेट्रो की पटरियों की जांच की। इसमें पता चला कि पटरियां तय मानक से कम मजबूत हैं। डिपो में पटरियों की मजबूती 229 से 242 बीएचएन (ब्रिनेल कठोरता संख्या) के बीच थी, जबकि मुख्य लाइन पर 291 से 308 बीएचएन के बीच। ये स्तर भारतीय रेलवे के मानकों से कम माने गए।सीधे शब्दों में कहें, तो मेट्रो में अपेक्षा से कम मजबूत पटरियां लगाई गईं। इससे पटरियां और ट्रेन के पहिए जल्दी घिस सकते हैं। भविष्य में मरम्मत पर ज्यादा खर्च आ सकता है।CAG ने माना कि कंपनी ने अंतरिम गति प्रमाण पत्र का नवीनीकरण भी नहीं कराया। मार्च- 2017 में प्रमाणपत्र जारी हुआ था, जिसकी अवधि 5 साल होती है। इस प्रमाण पत्र से यह तय होता है कि मेट्रो ट्रेन कितनी सुरक्षित गति से चल सकती है? उसके पहियों में कितनी टूट-फूट हो रही? कुल मिलाकर कहें तो गति प्रमाण पत्र का नवीनीकरण नहीं कराकर यात्रियों की सुरक्षा को अनावश्यक जोखिम में डाला गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button