48वां सालाना दस्तारबंदी व पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न
मदरसा आलिया इरफ़ानिया ख़िदमाते क़ुरआन का एक रौशन मीनार : मौलाना खालिद रशीद

एन0आई0टी0 ब्यूरों
लखनऊ। तहज़ीब के शहर लखनऊ के प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान मदरसा आलिया इरफ़ानिया, अब्दुल अज़ीज़ रोड, चौक, लखनऊ का 48वां सालाना दस्तारबंदी व पुरस्कार वितरण समारोह बड़े ही गरिमामय और भव्य वातावरण में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मदरसे के नाज़िम व मोहतमिम कारी इम्तियाज़ अहमद प्रतापगढ़ी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में ईदगाह लखनऊ के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली तथा दारुल उलूम नदवतुल उलेमा के नाज़िम-ए-आम मौलाना सैयद अम्मार हुसैनी नदवी ने शिरकत की।
कार्यक्रम दो सत्रों में सम्पन्न हुआ। पहले सत्र में क़िराअत विभाग से फ़ारिग़ होने वाले छात्रों और उस्तादों द्वारा क़ुरआन पाक की तिलावत का प्रदर्शन किया गया। सत्र का शुभारंभ मौलाना कारी साजिद हुसैन नदवी ने क़ुरआन पाक की तिलावत से किया। इसके बाद क़िराअत विभाग के फ़ारिगीन ने रिवायत हफ़्स और क़िराअत सबअह में बेहतरीन अंदाज़ में तिलावत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उस्तादों में कारी मोहम्मद अफरोज़ आलम इरफ़ानी, कारी मोहम्मद असद इरफ़ानी, कारी निसार अहमद और कारी इमरान अहमद रहमानी ने भी प्रभावशाली तिलावत पेश कर महफ़िल को रौशन कर दिया।
दूसरा सत्र नमाज़-ए-इशा के बाद पुरस्कार वितरण और दस्तारबंदी पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम की शुरुआत मदरसे के तराने से हुई, जिसे छात्र मोहम्मद मासूम और उनके साथियों ने प्रस्तुत किया।
हिफ़्ज़ विभाग के दो छात्रों—मोहम्मद अली (लखनऊ) और मोहम्मद मोहसिन (झारखंड)—जिन्होंने एक बैठक में पूरा क़ुरआन सुनाने का सम्मान प्राप्त किया, उन्हें मोहतमिम की ओर से “रईसुल कुर्रा कारी मुश्ताक अहमद प्रतापगढ़ी रह.” अवॉर्ड, पाँच-पाँच हजार रुपये नगद और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
इसी प्रकार विभिन्न विभागों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों—मोहम्मद जिब्रील (हिफ़्ज़), मोहम्मद रेहान रफ़ीक (क़िराअत रिवायत हफ़्स), सरवर हुसैन (क़िराअत सबअह) और मोहम्मद रेहान (अरबी विभाग)—को भी एक-एक हजार रुपये नगद, अवॉर्ड और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
मदरसे से संचालित “कारी मुश्ताक अहमद कंप्यूटर इंस्टीट्यूट” तथा “कारी मुश्ताक अहमद प्रतापगढ़ी स्पोकन इंग्लिश सेंटर” के छात्रों को भी उनके पाठ्यक्रम पूर्ण करने पर प्रमाणपत्र व पुरस्कार दिए गए। विभिन्न कक्षाओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त 140 हाफ़िज़ और कुर्रा की दस्तारबंदी सम्मानित अतिथियों और उलेमा-ए-किराम के हाथों संपन्न हुई।
अपने संबोधन में मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, “मदरसा आलिया इरफ़ानिया ख़िदमाते क़ुरआन का एक रौशन मीनार है। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का यहां से शिक्षित होकर सम्मानित होना इस संस्थान की विशिष्ट पहचान है।” उन्होंने मोहतमिम कारी इम्तियाज़ अहमद प्रतापगढ़ी को बधाई देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में संस्था निरंतर प्रगति कर रही है।
मौलाना सैयद अम्मार हुसैनी नदवी ने अपने वक्तव्य में कहा कि क़ुरआन की सेवा और उसकी तालीम का प्रसार सबसे श्रेष्ठ कार्य है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में इल्म हासिल करना हर मुस्लिम पुरुष और महिला के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग दस हजार हाफ़िज़, कुर्रा और उलेमा इस मदरसे से शिक्षा प्राप्त कर देश-विदेश में सेवाएं दे रहे हैं, जो संस्था की सफलता का प्रमाण है।
कार्यक्रम में मदरसे की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई और अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। संचालन की जिम्मेदारी मौलाना मोहम्मद अज़हरुल इस्लाम नदवी और आसिम काकोरी ने निभाई।
इस अवसर पर शहर के अनेक उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं तथा क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।इस अवसर पर एजाज साहब,शहाबुद्दीन कुरैशी,अब्दुल वहीद,मौलाना मुश्ताक आदि मौजूद थे।



