1980 से पहले की सादी थाली से जंक फूड तक का सफर, जानें कैसे शुगर रिस्क बढ़ाती गई भारतीय थाली
रिसर्च के मुताबिक, जेनरेशन एक्स (Gen X) में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स खाने की गंभीर लत चुकी है।
जर्नादन मिश्रा
पिछले तीन भागों में आपने खतरे की घंटी सुनी और शरीर के उन संकेतों को जाना जो 5-10 साल पहले ही आपको अलर्ट देना शुरु कर देते हैं, संभलिए शुगर दरवाजे पर पहुंच रही है। लेकिन जब हम नहीं जागे तो वो दरवाजे पर आ खड़ी हुई और फिर आपको, आपके परिवार के अन्य सदस्यों को नाते-रिश्तेदारों को अपनी गिरफ्त में लेती गई लेकिन ये सफर दो से तीन दिन या एक दिन का नहीं, बल्कि शुगर जैसी साइलेंट किलर बीमारी को शरीर में पनपने में लंबा समय बड़ा बदलाव लगा है। आपकी पीढ़ियों जितना बड़ा बदलाव…लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके लाइफस्टाइल डिजीज बनने की कहानी और आपकी थाली का कनेक्शन पढ़ें कैसे शुगर बन गई एक लाइफस्टाइल डिजीज…?
क्या आप जानते हैं कि 55 से 60 साल की उम्र के लोगों में एक बेहद खतरनाक लत घर कर चुकी है? यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की एक हालिया रिसर्च ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस रिसर्च के मुताबिक, जेनरेशन एक्स (Gen X) में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स खाने की गंभीर लत चुकी है।
डॉक्टरों के अनुसार, जेनरेशन एक्स पहली ऐसी पीढ़ी थी जिसने बचपन से ही अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को मजेदार और सामान्य खाना माना। उस दौर में टीवी पर रंग-बिरंगे पैकेट वाले स्नैक्स और फास्ट फूड के लुभावने विज्ञापन चलते थे। माता-पिता के काम पर होने के कारण, बच्चों ने फ्रेंच ब्रेड पिज्जा और रेडी-टू-ईट मील्स को ही अपना मुख्य खान-पान बना लिया।
रिसर्च की तुलना में 75 से 80 साल के लोग इस लत से काफी हद तक बचे हुए हैं। इनमें केवल 4% पुरुषों में ही यह लत पाई गई। इसका मुख्य कारण यह है कि उन्हें घर का खाना बनाना सिखाया गया था और उन्होंने इस आदत को हमेशा बनाए रखा।
1980 के दशक में कंपनियों ने महिलाओं को लुभाने के लिए लो-फैट और डाइट फूड्स को सेहतमंद बताकर प्रचारित किया। इन फूड्स में फैट कम करने के चक्कर में चीनी और आर्टिफिशियल स्वीटनर बढ़ा दिए गए। इससे लोगों में शुगर की क्रेविंग और ज्यादा बढ़ गई, जिसने इस लत को और मजबूत कर दिया।
आंकड़े बताते हैं कि इस उम्र की 21% महिलाएं और 10% पुरुष प्रोसेस्ड फूड्स की लत का शिकार हैं। हैरानी की बात यह है कि इसी आयु वर्ग में शराब की लत केवल 1.5% और स्मोकिंग की लत मात्र 4% लोगों में पाई गई है। यह बताता है कि पैकेट बंद खाने का मोह सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि वयस्कों के लिए भी एक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड ऐसे खाने को कहते हैं, जिसे बनाने में ऐसे केमिकल्स का इस्तेमाल होता है और हमारी रसोई में नहीं मिलते। इसमें प्रिजर्वेटिव, आर्टिफिशियल फ्लेवर, इमल्सीफायर और आर्टिफिशियल रंग भारी मात्रा में होते हैं। 70 और 80 के दशक में, जब जेनरेशन एक्स के लोग बच्चे थे, तब दुनिया में खाने के लिए कोई सख्त न्यूट्रिशनल स्टैंडर्ड नहीं थे। इसी का नतीजा है कि यह पीढ़ी बिना किसी चेतावनी के इन हानिकारक फूड्स के संपर्क में आई।



