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100% ब्लाइंड थान्या नाथन ने रचा इतिहासए बनीं केरल की पहली दृष्टिबाधित महिला जज

थान्या नाथन सी. केरल राज्य की पहली 100% ब्लाइंड जज बनेंगी। ज्यूडिशियल एग्जामिनेशन में पर्सन विथ डिसेबिलिटी लिस्ट में नाथन ने टॉप किया है।

Sanjay  Kumar Singh

 थान्या नाथन सी. देश की पहली 100% ब्लाइंड महिला जज बनेंगी

थान्या नाथन सी. केरल राज्य की पहली 100% ब्लाइंड जज बनेंगी। ज्यूडिशियल एग्जामिनेशन में पर्सन विथ डिसेबिलिटी लिस्ट में नाथन ने टॉप किया है।

  • जज बनने से पहले तक थान्या कन्नूर जिले के तालिपरम्बा में एक लॉयर के तौर पर प्रैक्टिशनर लॉयर थीं।
  • 24 वर्षीय थान्या देश और अपने राज्य की पहली 100% ब्लाइंड जज होंगी।
  • साल 2013 में राजस्थान के ब्रह्मानंद शर्मा पहले ब्लाइंड जज बने थे। दुनिया के पहले 100% ब्लाइंड जज सर जॉन एंथोनी वॉल माने जाते हैं।
  • सर जॉन एंथोनी 1991 में यूनाइटेड किंगडम में चांसरी डिवीजन में हाइकोर्ट न्यायालय के डिप्टी मास्टर नियुक्त किए गए थे।
  • अक्टूबर 2025 में जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की बेंच ने एक सुनवाई पर फैसला देते हुए कहा था, ‘ब्लाइंडनेस किसी कैंडिडेट् की जज बनने की योग्यता को कम नहीं कर सकती।’
  • सुप्रीम कोर्ट ने 25 नवंबर 2024 को 100% दृष्टिहीन लॉ स्टूडेंट को 1 दिसंबर को होने वाली कॉमन लॉ एंट्रेंस टेस्ट (CLAT) पोस्ट ग्रेजुएट परीक्षा 2024-25 में शामिल होने की अनुमति दी थी।
  • शिक्षा से न्यायालय तक का सफर
    • थान्या नाथन की उम्र: 24 वर्ष
    • शिक्षा: LLB – कन्नूर यूनिवर्सिटी (Kannur University)
    • उपलब्धि: LLB में प्रथम रैंक

    कानून की पढ़ाई के दौरान उन्होंने:

    • ब्रेल लिपि (Braille Script)
    • स्क्रीन-रीडिंग सॉफ्टवेयर और आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया।

    वकालत का अनुभव

    जज बनने से पहले थान्या ने:

    • कन्नूर के तालीपरंबा में
    • वरिष्ठ अधिवक्ता के. जी. सुनीलकुमार के अधीन
    • जूनियर वकील के रूप में प्रैक्टिस शुरू की

    वकालत के दौरान वह:

    • अपनी दलीलें
    • केस नोट्स

    ब्रेल लिपि में तैयार करती थीं, जो उनके अनुशासन और तैयारी को दर्शाता है।

    चुनौतियाँ और समाधान

    थान्या नाथन मानती हैं कि पुराने हस्तलिखित दस्तावेज़ पढ़ना एक चुनौती हो सकता है लेकिन उनका विश्वास है कि तकनीक, अनुभव, और सिस्टम में सुधार इन चुनौतियों को दूर करने में मदद करेंगे।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अहम भूमिका

    थान्या ने अपनी सफलता का श्रेय:

    • अपने सीनियर्स के प्रोत्साहन
    • और सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले को दिया

    जिसने दिव्यांगजनों के लिए न्यायपालिका के दरवाज़े पूरी तरह खोल दिए और समान अवसर सुनिश्चित किए।

    केरल न्यायपालिका में नई शुरुआत

    थान्या नाथन की नियुक्ति केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं है, बल्कि इससे:

    • अदालतों के Infrastructure को दिव्यांग-अनुकूल बनाने
    • Accessibility और Inclusivity पर ज़्यादा ध्यान देने

    की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

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