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शिक्षा के साथ खेल भी ज़रूरी: अमर पाल मौर्य ने उठाई आवाज़
प्रयागराज। राज्य सभा सांसद अमर पाल मौर्य ने सभापति के समक्ष कक्षा एक से खेल शिक्षा को अनिवार्य विषय बनाने की मांग रखते हुए इस पर सरकार से गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।

विजय कुमार यादव
प्रयागराज। राज्य सभा सांसद अमर पाल मौर्य ने सभापति के समक्ष कक्षा एक से खेल शिक्षा को अनिवार्य विषय बनाने की मांग रखते हुए इस पर सरकार से गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है। उच्च सदन में सभापति के समक्ष उक्त विषय पर अपनी बात रखते हुए अमर पाल मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहलों के माध्यम से देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिला है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आज हमारे खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर रहे हैं। किंतु दूसरी तरफ जिस तेजी से बच्चों में मोबाइल फोन, सोशल मीडिया ऑन लाइन गेम्स का प्रभाव बढ़ रहा है वो एक गंभीर विषय है।उन्होंने कहा कि इनके प्रभाव के कारण बच्चों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दिनचर्या नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रही है। जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। अतः सरकार से मांग है कि कक्षा एक से खेल शिक्षा को अनिवार्य विषय बनाया जाए। प्रत्येक विद्यालय के टाइम टेबल में प्रतिदिन कम से कम एक पीरियड खेल के लिए निर्धारित किया जाए। सभी निजी व सरकारी विद्यालयों में खेल सुविधाएं सुनिश्चित की जाए। शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। प्रारंभिक स्तर से प्रतिभा खोज कार्यक्रम शुरू किया जाए। पारंपरिक भारतीय खेलों जैसे कबड्डी, खोखो, गिल्ली डंडा आदि को भी स्कूल खेल कार्यक्रम में शामिल किया जाए। राज्य सभा सांसद अमर पाल मौर्य ने कहा कि ये एक गंभीर तथ्य है कि भारत में 4 करोड़ से अधिक बच्चे मोटापे व अस्वस्थ जीवन शैली से प्रभावित हैं और यदि इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो ये बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि फिनलैंड, जापान, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा आदि विश्व के कई देशों में प्राथमिक स्तर से ही खेल शिक्षा को अनिवार्य किया गया है। स्वस्थ बच्चा ही स्वस्थ भारत का निर्माण कर सकता है।




