शाइन सिटी :60हजार करोंड़ की ठगी का मास्टरमाइंड राशिद दुबई में गिरफतार
10 महीने पहले लखनऊ की विशेष अदालत ने राशिद को भगोड़ा घोषित किया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम उसे लखनऊ लेकर आएगी।

संजय कुमार सिंह
शाइन सिटी ग्रुप के प्रमोटर और 1000 करोड़ के ठग राशिद नसीम को दुबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम उसे लखनऊ लेकर आएगी। 10 महीने पहले लखनऊ की विशेष अदालत ने राशिद को भगोड़ा घोषित किया था। राशिद नसीम और उसकी कंपनियों के खिलाफ पुलिस करीब 554 एफआईआर दर्ज कर चुकी है। आरोप है कि निवेश के नाम पर उसने लोगों से 800 से 1000 करोड़ रुपए की ठगी की है। लुभावने रिटर्न का वादा कर लोगों से पैसा वसूला गया और फिर 2019 में राशिद नसीम देश छोड़कर दुबई फरार हो गया था। दुबई पुलिस ने ईडी और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के अनुरोध पर ये कार्रवाई की है। संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय एजेंसियों के कॉर्डिनेशन से राशिद को पकड़ा गया है। लंबे समय से उसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही थी।
1000 करोड़ की प्रॉपर्टी पहले ही जब्त सरकारी एजेंसियों ने राशिद और उससे जुड़ी कंपनियों की सैकड़ों करोड़ की संपत्तियां जब्त की हैं। 2021 में जारी एक ऑडियो में राशिद ने खुद दावा किया था कि सरकार उसकी करीब 500 करोड़ रुपए की संपत्ति कब्जे में ले चुकी है, जिसकी मौजूदा कीमत लगभग 1000 करोड़ रुपए बताई जाती है। उस ऑडियो में यह भी कहा गया था कि करीब 300 करोड़ रुपए किसानों और ब्रोकरों के बीच फंसे हैं। जमीन दिलाने वाले कुछ दलालों के फरार होने और रजिस्ट्री विवादों के कारण कंपनी कानूनी उलझनों में फंसी हुई है। हालांकि जांच एजेंसियां इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि कर रही हैं। भाई पहले ही गिरफ्तार राशिद और उसके भाई आसिफ पर गृह विभाग की ओर से 5-5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। इससे पहले इन पर 50-50 हजार रुपए का इनाम था। कंपनी से जुड़े अन्य पांच आरोपियों पर भी एक-एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। आसिफ को पहले ही प्रयागराज से गिरफ्तार किया जा चुका है। कोर्ट के आदेश पर ईओडब्ल्यू और ईडी दोनों एजेंसियां जांच आगे बढ़ा रही हैं। अब राशिद की गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ में बड़े वित्तीय नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।
दुबई से ऑपरेट होता था सिंडिकेट जांच एजेंसियों का दावा है कि दुबई में बैठकर राशिद पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। बताया जा रहा है कि उसने वहां बड़ा निवेश किया और भारत में अपने सहयोगियों के जरिए गतिविधियां जारी रखीं। 2018 में नेपाल में गिरफ्तारी और जमानत के बाद वह दुबई पहुंचा था। कई वर्षों तक गिरफ्तारी से बचते रहने के कारण उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है। एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि ठगी की रकम किस-किस चैनल से विदेश भेजी गई। कहां-कहां दर्ज हैं मुकदमे शाइन सिटी घोटाले का मास्टरमाइंड राशिद नसीम प्रयागराज के जीटीबी नगर, करेली का रहने वाला है। उसके खिलाफ सबसे अधिक मुकदमे लखनऊ में दर्ज हैं, क्योंकि यहां कंपनी का मुख्यालय था। गोमतीनगर, विकासनगर, बीकेटी, मोहनलालगंज और गोसाईगंज में केस दर्ज हैं। इसके अलावा प्रयागराज में कई मामले दर्ज हैं। क्योंकि कंपनी के प्रमोटरों के मूल निवास प्रयागराज में ही था। वाराणसी में भी अलग अलग थाना क्षेत्रों में शाइन सिटी के प्रमोटर्स के खिलाफ मामले दर्ज हैं। गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई भी यहीं से हुई थी। कैसे किया घोटाला? शाइन सिटी ग्रुप पर आरोप है कि पॉन्जी और पिरामिड स्कीम चला कर कंपनी ने रियल एस्टेट निवेश, प्लॉट, घर, फ्लैट व अन्य आकर्षक योजनाओं के नाम पर निवेशकों से पैसा जुटाया था। निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच दिया गया था, लेकिन यह एक पॉन्जी स्कीम थी, जिसमें नए निवेशकों का पैसा पुराने निवेशकों को देने के लिए इस्तेमाल किया गया। निवेशकों को न तो वादा किए गए प्लॉट या संपत्तियां दी गईं और न ही रिटर्न। कई मामलों में, प्लॉट के दस्तावेज फर्जी पाए गए थे। मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप कंपनी ने निवेशकों से जुटाए गए पैसे को विभिन्न फर्जी कंपनियों, डायरेक्टरों और सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर किया। इन फंड्स का उपयोग जमीन, ऑफिस स्पेस और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स खरीदने में किया गया, जो बाद में मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा पाया गया था। जांच में पता चला कि कंपनी ने 34 से अधिक फर्जी कंपनियां बनाईं, जिनके जरिए निवेशकों को गुमराह किया गया। रेरा (RERA) की जांच में पाया गया कि लखनऊ में 58 प्लॉट का रजिस्ट्रेशन था, लेकिन 3,000 की बुकिंग दिखाई गई। अब तक क्या कार्रवाई हुई है? शाइन सिटी घोटाले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी। लेकिन जब एक के बाद एक मामले दर्ज होने लगे तो सभी केस ईओडब्ल्यू को सौंप दिए गए थे। बाद में यूपी में दर्ज मुकदमों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू की। इस मामले में अब तक 63 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से राशिद नसीम समेत उसका भाई असिफ नसीम जो नवंबर 2021 में गिरफ्तार हुआ था। हिमांशु कुमार जुलाई, 2024 में गिरफ्तार हुआ। मनीष जायसवाल (उपाध्यक्ष) की सितंबर 2024 में गिरफ्तारी की गई। ज्ञान प्रकाश उपाध्याय, मोहम्मद अकरम, शशि बाला, अभिषेक सिंह, दुर्गा प्रसाद, उद्धव सिंह, अमिताभ श्रीवास्तव, मीरा श्रीवास्तव की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अब तक ईडी ने क्या की कार्रवाई ED ने 554 FIR के आधार पर जनवरी 2021 में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। अब तक कुल 266.70 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की गईं, जिनमें लखनऊ के मोहनलालगंज में 24 कृषि भूमि (47.80 करोड़), बाराबंकी में 6 आवासीय भूखंड (16.5 करोड़), हरियाणा के रेवाड़ी में स्प्रिंगडेल प्रोजेक्ट में कॉमर्शियल संपत्तियां (9.27 करोड़), बिहार के पटना में 20 करोड़ की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं।कहां-कहां हैं शाइन सिटी के प्रोजेक्ट लखनऊ के मोहनलालगंज में शाइन वैली सेक्टर 1, जवाहिर सिटी प्रोजेक्ट, कानपुर, प्रयागराज, बाराबंकी और वाराणसी, कौशांबी जैसे शहरों में शाइन सिटी अपने प्रोजेक्ट चला रहा था। यूपी में हजार करोड़ ठगने वाला राशिद नसीम भगोड़ा घोषित:दुबई में छिपा बैठा, फेसबुक पर लिखा- ये FIR हैं या अलिफ लैला के किस्से यूपी में शाइन सिटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी सफलता मिली है। लखनऊ की विशेष अदालत ने गुरुवार को शाइन सिटी ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रमोटर राशिद नसीम को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया।




