विलुप्त हो रही लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए नई योजनाएं तैयार की जाएं

(एन.आई.टी. ब्यूरो) लखनऊ
लखनऊ : 17 दिसम्बर, 2024 उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने संस्कृति विभाग के अधीन संचालित स्वायत्तशासी संस्थानों में नव मनोनीत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों को बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अपने-अपने संस्थानों की गतिविधियों को तेजी से धरातल पर उतारने के लिए नई योजनाएं एवं कार्यक्रम तैयार करें, जिससे लोक कलाओं के संरक्षण के साथ ही कलाकारों को योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विलुप्त होती जा रही लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति कटिबद्ध है। इसलिए पूरी लगन एवं निष्ठा के साथ कार्य करें।
पर्यटन मंत्री सोमवार को देर शाम योजना भवन के सभागार में नव मनोनीत अध्यक्षों एवं सदस्यगणों की परिचयात्मक बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वायत्तशासी संस्थानों एवं अकादमियों में संचालित योजनाओं को जनोपयोगी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि कलाकारों को प्राचीन कलाओं को नये सिरे से निखारने तथा संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करें। इसके साथ ही लोक कलाओं को पुनर्जीवित एवं संरक्षित किये जाने के लिए जिला, ब्लॉक तथा पंचायत स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करें।
श्री जयवीर सिंह ने कहा कि लोक कलाएं हमारी समृद्ध संस्कृति तथा लोक जीवन को जीवंत बनाने के मूल आधार हैं। ग्रामीण अंचलों में विविध लोक संगीत के कलाकार मौजूद हैं, उनकी कला को मंच प्रदान करना भी संस्थानों की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही जनमानस में लोक संगीत से जुड़ी विभिन्न विधाओं के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने का दायित्व भी है। सभी सम्मानित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष/सदस्यगण सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रदर्शन हेतु अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य करें, जिससे विलुप्त हो रही कलाओं को संरक्षित किया जा सके।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि मा0 मुख्यमंत्री जी ने संस्कृति विभाग से जुड़े कलाकारों को संरक्षण देने तथा सांस्कृतिक विरासत को संजोये जाने के लिए प्राथमिकता दी है। इसलिए लोक विरासत की कलाओं को बचाने के लिए संस्थान एवं अकादमी अपने-अपने स्तर से कार्य करें। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति श्री मुकेश मेश्राम ने नव नामित अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यगणों से आग्रह किया कि अपने दायित्वों का भली-भांति निर्वहन सुनिश्चित करें, ताकि प्रदेश की लोक कलाओं को संरक्षित किया जा सके।
इस अवसर पर भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ0 रति शंकर त्रिपाठी, उ0प्र0 राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ0 सुनील कुमार विश्वकर्मा व उपाध्यक्ष श्री गिरीश चन्द्र, उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रोफेसर श्री जयंत खोत एवं उपाध्यक्ष श्रीमती विभा सिंह, बिरजू महराज कथक संस्थान की अध्यक्ष श्रीमती कुमकुमधर एवं उपाध्यक्ष श्रीमती मिथलेश, उ0प्र0 जैन विद्या शोध संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ0 अभय जैन तथा अन्तर्राष्ट्रीय बोद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष श्री हरिगोविन्द कुशवाहा तथा अकादमियों में नामित सदस्यगण के अलावा पर्यटन सलाहकार श्री जे0पी0 सिंह व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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