उत्तर प्रदेश
विद्यार्थियों को रंग संयोजन और रेखांकन की सूक्ष्मताओं से कराया परिचित
प्रयागराज। चम्पावत सरस कॉर्बेट महोत्सव 2026 की विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के अंतर्गत संपन्न दो दिवसीय कला कार्यशाला (लोक और समकालीन कला) महोत्सव का आकर्षण रही। इस सृजनात्मक आयोजन का समन्वयन प्रख्यात चित्रकार तथा ‘कला दीर्घा’ अंतर्राष्ट्रीय दृश्य कला पत्रिका के संपादक डॉ. अवधेश मिश्र द्वारा किया गया।

Vijay Yadav
प्रयागराज। चम्पावत सरस कॉर्बेट महोत्सव 2026 की विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के अंतर्गत संपन्न दो दिवसीय कला कार्यशाला (लोक और समकालीन कला) महोत्सव का आकर्षण रही। इस सृजनात्मक आयोजन का समन्वयन प्रख्यात चित्रकार तथा ‘कला दीर्घा’ अंतर्राष्ट्रीय दृश्य कला पत्रिका के संपादक डॉ. अवधेश मिश्र द्वारा किया गया। उनके मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में जहाँ सौ से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर मधुबनी और समकालीन कला की बारीकियां सीखीं, वहीं वैश्विक परिप्रेक्ष्य में स्थानीय संस्कृति के महत्त्व पर सार्थक संवाद हुआ।
डॉ. मिश्र ने प्रतिभागियों को कला में संवेदना का महत्त्व, स्थानीय सुगंध और ध्वनियों का कला सृजन में बहुविधि सार्थक प्रयोग, रंगों के संतुलन, रेखाओं की सटीकता, विषय चयन की संवेदनशीलता, संरचना की वैज्ञानिक समझ तथा अभिव्यक्ति की मौलिकता पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने अपने तीन दशकों के सृजनात्मक अनुभवों को साझा करते हुए यह स्पष्ट किया कि कला केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि अनुशासन, समय प्रबंधन और नैतिक प्रतिबद्धता का समन्वित परिणाम है।
इस अवसर पर डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के कलाचार्य डॉ अवधेश मिश्र द्वारा उत्तराखण्ड की पारंपरिक ऐपण कला सहित देश की विविध लोक शैलियों के सांस्कृतिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को रंग संयोजन और रेखांकन की सूक्ष्मताओं से परिचित कराया।
कार्यक्रम का समापन करते हुए चम्पावत सरस कॉर्बेट महोत्सव 2026 के मंच पर डॉ अवधेश मिश्र को आयोजकों द्वारा महोत्सव का स्मृति चिन्ह, सम्मानपत्र और स्थानीय शिल्पों का उपहार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य शिक्षा अधिकारी मेहरबान सिंह बिष्ट, सहायक परियोजना निदेशक विम्मी जोशी, प्रबंधक उद्योग पंकज तिवारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की।




