प्रादेशिक

ममता के गढ़ भवानीपुर में भी नंदीग्राम वाला इतिहास दोहराएगा? बंगाल चुनाव का पूरा गेम ही बदल जाएगा

NIT-News मशहूर क्रिकेटर और वर्ल्ड कप विजेता टीम के कप्तान कपिल देव ने कहा था कि वेन यू टेस्ट सक्सेस, योर टंग वांट मोर यानी एक बार सफलता का स्वाद चख लो, तो जीभ (मन) और अधिक मांगती है। कोई खिलाड़ी जो अप्रत्याशित रूप से एक अधिक मजबूत प्रतिद्वंद्वी को हरा देता है तो उसे जायंट किलर कहा जाता है।

NIT-News

मशहूर क्रिकेटर और वर्ल्ड कप विजेता टीम के कप्तान कपिल देव ने कहा था कि वेन यू टेस्ट सक्सेस, योर टंग वांट मोर यानी एक बार सफलता का स्वाद चख लो, तो जीभ (मन) और अधिक मांगती है। कोई खिलाड़ी जो अप्रत्याशित रूप से एक अधिक मजबूत प्रतिद्वंद्वी को हरा देता है तो उसे जायंट किलर कहा जाता है। राजनीति में भी ऐसे ही नाम हैं।  साल 2019 के लोकसभा चुनाव में सुब्रत पाठक कन्नौज में डिंपल यादव को हराया। स्मृति ईरानी जिन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को अमेठी में हराया। केपी यादव ने गुणा में ज्योतिरादित्य सिंधिया को मात दी थी। दिल्ली के पूर्व सीएम आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल को बीजेपी नेता प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने हार का स्वाद चखाया। लेकिन एक ऐसे ही जायंट किलर जिन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ने नंदीग्राम से चुनाव लड़कर शिकस्त दी। वो नाम टीएमसी से उसी साल बीजेपी में आए शुभेंदु अधिकारी का है। लेकिन पांच साल बाद, संकेत मिल रहे हैं कि शुभेंदु 2026 के चुनाव में ममता के कोलकाता स्थित गढ़ भाबनीपुर से उन्हें चुनौती दे सकते हैं। कभी घनिष्ठ सहयोगी रहे इन दोनों ने नंदीग्राम आंदोलन में साथ काम किया था। ममता के साथ मिलकर सीपीआई (एम) को सत्ता से बेदखल किया था और 2011 में तृणमूल कांग्रेस के उदय का मार्ग प्रशस्त किया। 2021 के चुनावों से ठीक पहले अधिकारी के भाजपा में शामिल होने के साथ ही दोनों के रिश्ते में दरार आ गई। नीतजतन नंदीग्राम में एक रोमांचक मुकाबले का मंच तैयार हो गया। फिर क्या था वो सीट जो तृणमूल की सफलता का प्रतीक थी, वहां उसकी सबसे बड़ी नेता की हार की कहानी लिखी गई। ममता बनर्जी का नंदीग्राम सीट पर पुनः अधिकार प्राप्त करने का प्रयास लगभग 2,000 वोटों से असफल रहा, हालांकि उनकी तृणमूल कांग्रेस ने राज्य चुनाव जीत लिया। बाद में वे भाबानीपुर लौट आईं और उपचुनाव में निर्णायक अंतर से जीत हासिल करते हुए तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं। अब सवाल यह उठता है कि क्या नंदीग्राम 2021 का नाटक 2026 में भवानीपुर में दोहराया जाएगा? हालिया राजनीतिक संकेतों और बयानों से अटकलें तेज हो रही हैं, और सुवेंदु अधिकारी द्वारा ममता बनर्जी को उन्हीं के गढ़ में चुनौती देने की संभावना पर चर्चा बढ़ती जा रही है।भवानीपुर में भाजपा के लिए आत्मविश्वास का एक प्रमुख स्रोत पश्चिम बंगाल में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के परिणाम रहे हैं। एसआईआर प्रक्रिया के परिणामस्वरूप 6 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जबकि 6 लाख नाम अभी भी विचाराधीन हैं। हालांकि इन सभी नाम हटाए जाने से राज्य की सभी सीटें प्रभावित हुईं, लेकिन कुछ सीटें दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित हुईं। इनमें से एक सीट भाबनीपुर है। एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची से पता चलता है कि इस सीट से कम से कम 47,000 नाम हटा दिए गए हैं, जबकि 14,154 नामों पर अभी भी विचार चल रहा है। इनमें से एक सीट भाबनीपुर है। एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची से पता चलता है कि इस सीट से कम से कम 47,000 नाम हटा दिए गए हैं, जबकि 14,154 नामों पर अभी भी विचार चल रहा है। नतीजतन, ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में, जहां 267 बूथ हैं, अंतिम सूची में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2,06,295 से घटकर 1,59,201 हो गई। वहीं, सुवेंदु की सीट नंदीग्राम में 2,78,212 मतदाताओं में से 10,599 नाम हटाए गए। तब से, कई भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि बनर्जी 2026 में अपना पुराना गढ़ खो देंगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button