उत्तर प्रदेश

मऊ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट मिले

दिनेश प्रजापति

मऊ जिले में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जिला कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने “काला कानून वापस लो” के नारे लगाए और सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। शिक्षकों की मुख्य मांग है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए। उनका तर्क है कि उत्तर प्रदेश में यह अधिनियम 27 जुलाई 2011 से प्रभावी हुआ था। नियमों के अनुसार, इसके बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए ही टीईटी अनिवार्य था, जबकि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को इससे छूट मिली हुई थी।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उच्चतम न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद, अब सभी राज्यों में अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने या पदोन्नति के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।

शिक्षकों ने इसे अन्यायपूर्ण बताया और केंद्र सरकार से अध्यादेश लाकर पुराने शिक्षकों को इस अनिवार्यता से छूट देने की मांग की। इस आंदोलन में कृष्णानंद राय और रामविलास भारती सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित थे।

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