आल इंडिया बैठक में संगठन मजबूती व राजनीतिक हालात पर मंथन, बहुजन मिशन को आगे बढ़ाने का आह्वान
बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की चार बार रहीं मुख्यमंत्री मायावती की अध्यक्षता में 22 फरवरी 2026 को लखनऊ स्थित पार्टी के केंद्रीय कैंप कार्यालय (12, माल एवेन्यू) में आयोजित ऑल इंडिया बैठक में संगठन की मजबूती, सर्वसमाज में जनाधार विस्तार, आर्थिक सहयोग और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर व्यापक समीक्षा की गई।

संजय कुमार सिंह
लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की चार बार रहीं मुख्यमंत्री मायावती की अध्यक्षता में 22 फरवरी 2026 को लखनऊ स्थित पार्टी के केंद्रीय कैंप कार्यालय (12, माल एवेन्यू) में आयोजित ऑल इंडिया बैठक में संगठन की मजबूती, सर्वसमाज में जनाधार विस्तार, आर्थिक सहयोग और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर व्यापक समीक्षा की गई। यह बैठक 7 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश में हुई बड़ी बैठक के बाद आयोजित की गई, जिसमें दिए गए दिशा-निर्देशों की राज्यवार प्रगति रिपोर्ट भी ली गई।बैठक में देश के विभिन्न महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों, उनसे जुड़े घटनाक्रमों और संसद में हुए टकराव व गतिरोध पर गहन चर्चा की गई। साथ ही ज्वलंत जनसमस्याओं के समाधान के लिए बेहतर राजनीतिक और साम्प्रदायिक माहौल की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि गरीब, मेहनतकश और बहुजन समाज को सम्मानजनक जीवन का अधिकार मिल सके।
बैठक में कहा गया कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश अंबेडकरवादियों की तरह देश के अन्य राज्यों में भी बड़ी संख्या में लोग मायावती को बहुजन समाज के आत्मसम्मान और स्वाभिमान की प्रतीक मानते हैं। यह विश्वास व्यक्त किया गया कि परमपूज्य भीमराव अंबेडकर के मिशन को आगे बढ़ाते हुए और संविधान को सही ढंग से लागू कर बहुजन समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।बैठक में यह भी कहा गया कि विरोधी पार्टियों और उनकी सरकारों की नीतियों के कारण, विशेषकर गरीब, किसान और बहुजन विरोधी रवैये, कथनी-करनी के अंतर तथा भ्रष्टाचार के आरोपों से उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। ऐसे में बीएसपी के सामने नई उम्मीद के रूप में उभरने और “सत्ता की मास्टर चाबी” हासिल करने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। इसके लिए कार्यकर्ताओं से तन, मन और धन से निरंतर संघर्ष का आह्वान किया गया।बैठक में यह भी कहा गया कि बीएसपी बड़े पूंजीपतियों पर निर्भर रहने के बजाय अपने समर्थकों के सहयोग से पार्टी संचालन की परंपरा पर कायम है। साथ ही चेतावनी दी गई कि बहुजन मिशन के बजाय निजी स्वार्थ के लिए कार्य करने वाले “बिकाऊ” और अवसरवादी तत्वों से सावधान रहना जरूरी है।अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में विभिन्न देशों के साथ व्यापारिक समझौतों, विशेषकर अमेरिका के साथ संभावित डील को लेकर देश में उठी चिंताओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में कहा गया कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत सरकार के सामने किसानों और बहुजनों के हितों की रक्षा करना बड़ी चुनौती है, और किसी भी समझौते में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए।बैठक के अंत में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, जनसंपर्क अभियान तेज करने और बहुजन समाज को “शोषित से शासक वर्ग” बनाने के मिशन को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।



