अच्छी नींद स्वस्थ जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक: डा० वेद प्रकाश
विभागाध्यक्ष प्रो० (डा०) वेद प्रकाश ने कहा कि नींद से जुड़ी बीमारियों की पहचान बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनके कारण हृदय रोग के मामले बढ़ रहे हैं और मधुमेह, रक्तचाप व मोटापा जैसी समस्याएं भी अनियंत्रित हो रही हैं।

बलराम सिंह /लखनऊ। श्वसन एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग, द्वितीय तल शताब्दी चिकित्सालय फेज-2, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ में 13 मार्च 2026 को विश्व नींद दिवस मनाया गया। इस वर्ष की थीम “अच्छी नींद लें, बेहतर जीवन जिएं” रखी गई है। विभागाध्यक्ष प्रो० (डा०) वेद प्रकाश ने कहा कि नींद से जुड़ी बीमारियों की पहचान बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनके कारण हृदय रोग के मामले बढ़ रहे हैं और मधुमेह, रक्तचाप व मोटापा जैसी समस्याएं भी अनियंत्रित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए समाज में जागरूकता और सही जानकारी देना जरूरी है।

सफलता की दौड़ में लोगों को अच्छी नींद का महत्व नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि अच्छी नींद शरीर की बुनियादी आवश्यकता है और हर रात की अच्छी नींद अगले दिन को बेहतर बनाती है। उन्होंने बताया कि विश्व नींद दिवस हर वर्ष नींद से संबंधित बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह दिवस विश्व नींद सोसायटी द्वारा वर्ष 2008 से मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य समाज में निद्रा विकारों को कम करना और लोगों को स्वस्थ नींद के महत्व के प्रति जागरूक करना है। यह दिवस हर वर्ष उस शुक्रवार को मनाया जाता है जब दिन और रात लगभग बराबर होते हैं। वर्ष 2026 में यह दिवस शुक्रवार 13 मार्च को मनाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार पूरे विश्व में लगभग 40 प्रतिशत वयस्क अनिद्रा से ग्रसित हैं, जो सबसे सामान्य निद्रा रोग है। लगभग 3 से 7 प्रतिशत वयस्क अवरोधक निद्रा श्वास रुकावट नामक बीमारी से प्रभावित हैं, जो दूसरा प्रमुख निद्रा विकार है। अधिकतर मामलों में यह बीमारी समय पर पहचान में नहीं आ पाती, जबकि यह उच्च रक्तचाप तथा मस्तिष्क संबंधी कई बीमारियों की प्रमुख वजह बनती है। अनुमान के अनुसार दुनिया में लगभग 93 करोड़ वयस्क इससे प्रभावित हैं, जिनमें करीब 42 करोड़ लोग मध्यम से गंभीर स्तर की समस्या से जूझ रहे हैं। यह विकार हृदय रोग, चयापचय संबंधी बीमारियों, पक्षाघात और अवसाद का जोखिम बढ़ाता है।

अनुमान है कि इस बीमारी के कारण विश्व स्तर पर हर वर्ष लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक का आर्थिक बोझ पड़ता है और करीब 80 प्रतिशत मामलों में इसकी पहचान देर से हो पाती है। इसके अलावा लगभग 2 से 3 प्रतिशत वयस्क बेचैन पैरों की समस्या से ग्रसित होते हैं, जबकि 4 से 5 प्रतिशत लोग अन्य निद्रा विकारों जैसे नींद में चलना या घबराहट की समस्या से प्रभावित पाए जाते हैं। लगभग 45 प्रतिशत लोग नींद की कमी के प्रभाव को महसूस करते हैं, जो उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है। विशेषज्ञों ने बताया कि अच्छी नींद स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद शरीर को ऊर्जा देती है और कार्यक्षमता बढ़ाती है, जबकि खराब नींद शरीर और मन दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। जिस प्रकार संतुलित आहार और नियमित व्यायाम जरूरी हैं, उसी प्रकार पर्याप्त नींद भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। नींद से जुड़ी बीमारियों के प्रमुख लक्षणों में दिन में अधिक नींद आना, नींद आने में कठिनाई, रात में बार-बार जागना, नींद पूरी न होना, तेज खर्राटे आना, नींद के दौरान घुटन महसूस होना, सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन, याददाश्त में कमी तथा नींद में चलना या बोलना शामिल हैं। निद्रा विकार की पहचान के लिए चिकित्सक मरीज का चिकित्सकीय इतिहास, नींद की जानकारी, शारीरिक परीक्षण तथा विभिन्न जांच उपकरणों का उपयोग करते हैं।

इसके बाद नींद अध्ययन सबसे सटीक जांच मानी जाती है, जिसमें मस्तिष्क की गतिविधि, आंखों की गति, हृदय की गति, सांस लेने का तरीका और शरीर की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर बीमारी की पहचान की जाती है। यदि इन बीमारियों का समय पर उपचार न किया जाए तो उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, मधुमेह, मोटापा, याददाश्त में कमी, पक्षाघात, मानसिक रोग और दिन में काम करने की क्षमता में कमी जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन समस्याओं से बचाव के लिए नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, योग, श्वास सहायक उपकरणों का उपयोग, मुख संबंधी उपकरण, आवश्यकता होने पर शल्य चिकित्सा तथा ऑक्सीजन चिकित्सा जैसे उपचार उपलब्ध हैं। श्वसन एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में इस बीमारी के निदान और उपचार के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। विभाग में अत्याधुनिक 64 चैनल वाली नींद प्रयोगशाला स्थापित है, जहां नींद अध्ययन किया जाता




